अमित शाह के UCC प्लान पर JDU का मंथन, नीतीश कुमार ने बुलाई 18 सितंबर की बैठक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) पर दिए गए एक बड़े बयान के बाद देश और खासकर बिहार के सियासी गलियारों में जबर्दस्त हलचल मच गई है।
इस नई राजनीतिक परिस्थिति को देखते हुए जनता दल (यूनाइटेड) के शीर्ष नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों (MLCs) की एक आपात और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
ये हाई-लेवल बैठक 18 सितंबर को पटना स्थित जेडीयू के प्रदेश कार्यालय में आयोजित की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, बैठक के एजेंडे में यूसीसी के संभावित ड्राफ्ट पर पार्टी की रणनीति तय करने के साथ-साथ लंबे समय से चर्चा में रही फरक्का जल संधि के मुद्दे पर भी गंभीर विचार-विमर्श शामिल है।
'2029 तक 21 NDA राज्यों में यूसीसी', मुंबई से शाह ने भरी थी हुंकार
ताजा राजनीतिक घमासान की शुरुआत 13 सितंबर को मुंबई में अमित शाह द्वारा दिए गए एक संबोधन से हुई। गृह मंत्री ने पूरा भरोसा जताते हुए कहा था कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। प्रस्तावित यूसीसी का मूल मकसद सभी नागरिकों के लिए धर्म और जाति से परे विवाह, तलाक, विरासत, संपत्ति बंटवारे और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। केंद्र सरकार की इस समयसीमा ने केंद्र और बिहार दोनों जगह भाजपा की सबसे अहम सहयोगी जेडीयू के सामने अपनी वैचारिक और सामाजिक स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती खड़ी कर दी है।
'पहले ड्राफ्ट देखेंगे, फिर तय करेंगे रुख'— जेडीयू का नपा-तुला स्टैंड
लोकसभा में 12 सांसदों वाली जेडीयू ने यूसीसी पर अब तक बेहद सतर्क और सधा हुआ रुख अपनाया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ जेडीयू नेता विजय कुमार चौधरी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी किसी भी जल्दबाजी में फैसला नहीं लेगी बल्कि पहले प्रस्तावित कानून के विस्तृत प्रावधानों की बारीकी से समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि यदि ड्राफ्ट में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिलता है, तो बिना वजह विरोध का कोई औचित्य नहीं है; और यदि कोई चिंताजनक बिंदु सामने आते हैं, तो उन्हें सीधे गृह मंत्री के समक्ष उठाया जाएगा। इसी सुर में जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही इस मसले पर अमित शाह से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करेगा।
पार्टी के भीतर अलग-अलग राय, फुलवारी शरीफ विधायक के बयान से असहजता
यूसीसी के मसले ने जेडीयू के आंतरिक हलकों में भी अलग-अलग विचारों को जन्म दिया है। फुलवारी शरीफ से पार्टी के वरिष्ठ विधायक श्याम रजक ने यह कहकर बहस छेड़ दी थी कि पार्टी संसद में तो यूसीसी बिल का समर्थन कर सकती है, लेकिन बिहार में इसे लागू किए जाने के पक्ष में नहीं है। रजक ने इस संदर्भ में नीतीश कुमार के पुराने बयानों का हवाला दिया। हालांकि, विजय कुमार चौधरी ने साफ किया कि जेडीयू किसी भी आधिकारिक फैसले पर पहुंचने से पहले पूरे मसौदे का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करेगी और एनडीए के सहयोगी दलों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम स्टैंड लेगी।
असदुद्दीन ओवैसी का तीखा हमला, आदिवासियों की छूट पर उठाए सवाल
दूसरी तरफ, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भोपाल में एक सभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार के यूसीसी प्लान पर जोरदार हमला बोला। ओवैसी ने आरोप लगाया कि यूसीसी के बहाने गैर-हिंदू समुदायों पर खास कानून थोपने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में यूसीसी के प्रावधानों से आदिवासी समुदायों को अलग रखा जा रहा है, तो फिर इसे 'समान' कैसे कहा जा सकता है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह कदम विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और उनकी संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता को कमजोर करने के लिए है। इसके साथ ही उन्होंने जेडीयू सहित अन्य एनडीए घटक दलों से भी अपील की कि वे इस कानून का खुलकर विरोध करें।