महागठबंधन का राजभवन मार्च और हाई-वोल्टेज ड्रामा: बैरिकेडिंग पर चढ़े तेजस्वी यादव
बिहार की राजधानी पटना (Patna) की सड़कों पर इस वक्त राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, और प्रशासनिक अमले से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मची हुई है। राज्य में बढ़ते अपराध, कानून-व्यवस्था की स्थिति, भ्रष्टाचार और विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर विपक्षी महागठबंधन (Mahagathbandhan) के तमाम बड़े नेताओं ने आज सड़क से लेकर राजभवन तक आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राजद (RJD) के तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं और विधायकों ने पटना की सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए राजभवन मार्च (Raj Bhavan March) निकाला। इस दौरान पुलिस द्वारा रोके जाने पर माहौल उस वक्त पूरी तरह तनावपूर्ण और नाटकीय हो गया जब तेजस्वी यादव खुद सुरक्षाबलों द्वारा लगाई गई लोहे की भारी-भरकम बैरिकेडिंग पर जा चढ़े। प्रशासन और पुलिस के पसीने छुड़ाने वाले इस हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामे के बाद आखिरकार विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल से मिलने की अनुमति मिल गई, जिसके बाद वे ज्ञापन सौंपने राजभवन के अंदर पहुंचे। आइए विस्तार से जानते हैं पटना की सड़कों पर हुए इस महाआंदोलन और राजभवन मार्च की पूरी अंदरूनी कहानी।
क्या है महागठबंधन के इस राजभवन मार्च की मुख्य वजह: कानून-व्यवस्था और रोजगार के मुद्दों पर सरकार को घेरा
बिहार में हाल के दिनों में हुई कुछ आपराधिक घटनाओं, बिगड़ती कानून-व्यवस्था (Law and Order), युवाओं के रोजगार के मुद्दों और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ महागठबंधन के सभी घटक दल एकजुट होकर सड़क पर उतरे हैं। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने मार्च शुरू होने से पहले एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि मौजूदा शासनकाल में अपराधियों के हौसला बुलंद हैं और आम जनता का जीना मुहाल हो गया है। विपक्ष का यह कहना था कि सरकार जनता के बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटका रही है, और इसी तानाशाही रवैये के खिलाफ राज्य के लोगों की आवाज को बुलंद करने के लिए यह राजभवन मार्च बुलाया गया है। पटना के विभिन्न कोनों से सुबह से ही झंडे-बैनर लेकर पहुंचे कार्यकर्ताओं के उमड़े जनसैलाब ने पुलिस प्रशासन के सुरक्षा प्रबंधों की कड़ी परीक्षा ले ली।
पटना की सड़कों पर भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग: तेजस्वी के तेवर देख उड़ गई प्रशासन की नींद
जैसे ही महागठबंधन का यह मार्च विधानसभा और डाकबंगला चौराहा की तरफ से राजभवन की ओर बढ़ने लगा, तो पुलिस और जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और वॉटर कैनन तैनात कर दिए थे। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सड़क पर कई स्तर की मजबूत लोहे की बैरिकेडिंग की गई थी, जिसे पार करना किसी के लिए भी आसान नहीं था। लेकिन जब पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया, तो आरजेडी नेता तेजस्वी यादव जोश में आकर सीधे बैरिकेडिंग के ऊपर जा चढ़े, जिससे वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और नेताओं के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की देखने को मिली। इस साहसी और आक्रामक तेवर को देखकर वहां मौजूद उनके समर्थक और भी ज्यादा जोश में आ गए और सरकार विरोधी नारों से पूरा पटना गूंज उठा।
राज्यपाल से मुलाकात और ज्ञापन सौंपने के बाद आगे की रणनीति का ऐलान: बिहार की सियासत में गर्माया माहौल
कड़ी मशक्कत और पुलिस के कड़े पहरे के बीच आखिरकार तेजस्वी यादव समेत महागठबंधन के चुनिंदा शीर्ष नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को राजभवन के अंदर जाकर महामहिम राज्यपाल से मिलने की अनुमति प्रदान की गई। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को राज्य की बिगड़ती स्थिति और विभिन्न मांगों से जुड़ा एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें सरकार को उचित निर्देश देने की मांग की गई है। इस पूरी घटना के बाद बिहार की राजनीति का तापमान और अधिक बढ़ गया है, और विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि यदि जनता की समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो इस आंदोलन को ब्लॉक और जिला स्तर पर और भी उग्र रूप दिया जाएगा। आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से इस महाआंदोलन को एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।