नीतीश कुमार की पंजाब में एंट्री से हिला सियासी गलियारा, BJP और विपक्ष के गणित में फंसी पेंच
बिहार की राजनीति से बाहर निकलकर नीतीश कुमार ने अब पंजाब की सियासी पिच पर बैटिंग करने की तैयारी कर ली है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने पंजाब विधानसभा चुनाव में अपने दम पर उतरने का ऐलान कर दिया है, जिसने न केवल सत्ताधारी आम आदमी पार्टी, बल्कि बीजेपी और कांग्रेस की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस कदम से राज्यों की राजनीति के समीकरण पूरी तरह से बदलते हुए नजर आ रहे हैं।
45 सीटों पर जेडीयू का मास्टरप्लान
जेडीयू की इस बड़ी घोषणा ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। पंजाब जेडीयू के अध्यक्ष मालवेंद्र सिंह बेनीपाल ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी पंजाब की कुल 117 सीटों में से 45 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। जेडीयू का यह फैसला सीधा असर बीजेपी के उन मंसूबों पर डाल सकता है, जो राज्य में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। अकेले दम पर चुनाव लड़ने की रणनीति यह दर्शाती है कि नीतीश कुमार पंजाब में भी एक 'थर्ड फ्रंट' के विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करना चाहते हैं।
नीतीश का 'पंजाब-बिहार' कनेक्शन और चुनावी रणनीति
पंजाब जेडीयू अध्यक्ष मालवेंद्र सिंह बेनीपाल ने पार्टी की रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि पूरा चुनावी अभियान नीतीश कुमार के व्यक्तित्व और उनके विकास मॉडल पर केंद्रित होगा। बेनीपाल ने बिहार और पंजाब के बीच के गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को अपना मुख्य आधार बताया है। उन्होंने सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के सफल आयोजन का हवाला देते हुए दावा किया कि पंजाब के लोगों में नीतीश कुमार के प्रति विशेष सम्मान है। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
चुनावी आहट और बदलते समीकरण
पंजाब में विधानसभा चुनाव की तारीखों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि चुनाव फरवरी 2027 में होने हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि इन्हें नवंबर 2026 में ही कराया जा सकता है। जेडीयू की इस अचानक सक्रियता ने पहले से ही चुनावी मोड में चल रही आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी के लिए सिरदर्द पैदा कर दिया है। जेडीयू का यह दांव भविष्य में किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा बनेगा या फिर त्रिकोणीय मुकाबले को और दिलचस्प बनाएगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।