अस्पताल के बेड से ऑनलाइन हाजिरी! हेडमास्टर पर इलाज के दौरान स्कूल में उपस्थिति दर्ज कराने का गंभीर आरोप, MLC की शिकायत पर DEO ने बैठाए जांच के घोड़े
सरकारी महकमों में फर्जीवाड़े और कागजी हेरफेर के अनोखे मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, लेकिन इस बार जो मामला उजागर हुआ है उसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर साहब पर आरोप लगा है कि वे अस्पताल में गंभीर बीमारी का इलाज कराते हुए बेड पर भर्ती थे, और उधर कागजों में उनकी स्कूल में नियमित उपस्थिति (हाजिरी) दर्ज हो रही थी। इस अनोखे और हैरान कर देने वाले मामले की शिकायत जब एक विधान पार्षद (MLC) तक पहुंची, तो उन्होंने इस पर कड़ा एक्शन लेते हुए सीधे उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तुरंत प्रभाव से जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा माजरा।
क्या है पूरा मामला और कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक (Headmaster) कुछ समय से स्वास्थ्य खराब होने के चलते अस्पताल में भर्ती थे और उनका मेडिकल ट्रीटमेंट चल रहा था। कायदे से इस दौरान उन्हें मेडिकल लीज (चिकित्सा अवकाश) पर होना चाहिए था या फिर नियमसंगत प्रक्रिया के तहत छुट्टी लेनी चाहिए थी। लेकिन आरोप है कि अस्पताल के बिस्तर पर आराम फरमा रहे हेडमास्टर साहब ने स्कूल की उपस्थिति पंजी (Attendance Register) में अपनी हाजिरी लगातार चालू रखी। जब इस अजीबोगरीब खेल की भनक स्थानीय लोगों और शिक्षा प्रेमियों को लगी, तो उन्होंने इसकी पुख्ता शिकायत क्षेत्र के विधान पार्षद (MLC) से कर दी।
MLC की सख्त शिकायत के बाद हरकत में आया विभाग
मामले की गंभीरता को भांपते हुए विधान पार्षद ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और बड़े फर्जीवाड़े का रूप मानते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी। शिकायत में इस बात के पुख्ता प्रमाण होने का दावा किया गया कि अस्पताल के दस्तावेजों में मरीज के तौर पर दर्ज व्यक्ति उसी अवधि में स्कूल का आधिकारिक रूप से उपस्थित कर्मचारी कैसे दिखाया जा सकता है। MLC की इस कड़ी आपत्ति और शिकायत के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में मामले की फाइल खोली गई।
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश
शिकायत मिलने के तुरंत बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने मामले की तह तक जाने के लिए एक जांच कमेटी गठित कर दी है और स्पष्ट आदेश दिए हैं कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पड़ताल की जाए।
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अस्पताल और स्कूल के रिकॉर्ड का मिलान: जांच टीम इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि जिस अवधि में हेडमास्टर अस्पताल के भर्ती रजिस्टर में एडमिट थे, उसी दौरान स्कूल के रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर या उपस्थिति कैसे दर्ज हुई।
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दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई: DEO कार्यालय का कहना है कि यदि जांच में हेडमास्टर दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सरकारी नियमों के तहत वित्तीय अनियमितता और फर्जी उपस्थिति दर्ज करने का अनुशासनात्मक मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।