UCC के मुद्दे पर भांजी जा रही सियासी तलवार; जानिए अंदर की असली कहानी
बिहार की राजनीति एक बार फिर से बेहद रोमांचक और सनसनीखेज मोड़ पर आ खड़ी हुई है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर हमेशा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और उनकी कार्यशैली पर तीखे हमले करने वाले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) अचानक से उनकी इतनी 'चिंता' क्यों करने लगे हैं? हाल ही में देश भर में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू किए जाने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद बिहार का सियासी पारा अचानक हाई हो गया है। इसी मुद्दे पर जहाँ एक तरफ सत्ताधारी एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को लेकर कुछ ऐसे तीखे और रणनीतिक बयान दिए हैं, जिनके राजनीतिक मायने बेहद गहरे हैं। तेजस्वी यादव ने जदयू (JDU) के भीतर चल रही खींचतान और यूसीसी के मुद्दे पर पार्टी के रुख को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधे तंज कसने के साथ-साथ यह दिखाने की कोशिश की है कि कैसे उनकी पार्टी को अंदरखाने कमजोर किया जा रहा है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि यूसीसी के इस नए सियासी संग्राम के पीछे तेजस्वी यादव की असल राजनीतिक रणनीति क्या है और वे क्यों अचानक नीतीश कुमार के राजनीतिक वजूद को लेकर इतने मुखर नजर आ रहे हैं।
क्या है पूरा मामला और क्यों अचानक गरमाया है यूसीसी (UCC) का राजनीतिक मुद्दा?
पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक सार्वजनिक मंच से यह बयान दिया कि देश के एनडीए शासित राज्यों में 2029 से पहले चरणबद्ध तरीके से यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बड़े ऐलान के सामने आते ही बिहार के राजनीतिक दलों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई, क्योंकि जेडीयू का पारंपरिक रूप से यह स्टैंड रहा है कि वह वैचारिक और व्यावहारिक स्तर पर बिना व्यापक आम सहमति के ऐसे किसी भी कानून को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रखती है। हालांकि जेडीयू के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं, जहां कुछ नेता इसके प्रावधानों के अध्ययन की बात कह रहे हैं तो वहीं कुछ नेता राज्य में इसके विरोध की बात दोहरा रहे हैं। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए विपक्षी दल आरजेडी ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है और यह साबित करने की कोशिश की है कि जेडीयू अब अपने वैचारिक हितों से पूरी तरह समझौता कर चुकी है।
तेजस्वी यादव का तीखा हमला: 'भाजपा जो चाहती है, वही जेडीयू में होता है और इसके लिए संजय झा जिम्मेदार हैं'
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने मीडिया के सामने खुलकर बयान देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी पर बहुत बड़ा हमला बोला है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि जेडीयू अब स्वतंत्र पार्टी नहीं रह गई है और वह पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी के इशारों पर काम कर रही है। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और विशेष रूप से जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को आड़े हाथों लेते हुए यह तक कह दिया कि उन्होंने पार्टी को अंदर से कमजोर और बर्बाद कर दिया है। तेजस्वी का यह कहना था कि यूसीसी जैसे संवेदनशील और वैचारिक मुद्दों पर भी जेडीयू अपना स्पष्ट और मजबूत स्टैंड लेने से डर रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब पहले की तरह अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी की यह 'चिंता' असल में नीतीश कुमार के बहाने उनकी पार्टी के अंदरूनी कार्यकर्ताओं और उस वोटर बेस को संदेश देने की एक सोची-समझी रणनीति है जो धर्मनिरपेक्ष और वैचारिक मुद्दों पर हमेशा से मुखर रहा है।
अचानक उमड़ा प्रेम या कोई बड़ा सियासी दांव? जानिए क्या है आरजेडी की असली रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का यह विश्लेषण है कि जब-जब एनडीए गठबंधन के भीतर बीजेपी और जेडीयू के बीच किसी नीतिगत फैसले को लेकर मतभेद उभरते हैं, तब-तब आरजेडी की तरफ से इस तरह के बयान सामने आते हैं जिनका मुख्य उद्देश्य सत्ता के खेमे में अविश्वास का माहौल पैदा करना होता है। हाल ही में आरजेडी के कुछ अन्य नेताओं द्वारा भी जेडीयू को लेकर जिस तरह के नरम और ऑफर वाले संकेत दिए गए थे, वे इसी कड़ी का हिस्सा माने जा रहे हैं। तेजस्वी यादव भले ही यह जताने की कोशिश कर रहे हों कि उन्हें नीतीश कुमार के इस तरह कमजोर होने की चिंता है, लेकिन असल में वे बिहार के अल्पसंख्यकों और पिछड़ों के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में केवल आरजेडी ही एक ऐसी ताकत है जो वैचारिक मुद्दों पर बिना डरे खुलकर खड़ी रहती है।
आने वाले दिनों में बिहार की सियासत में और तेज होगी हलचल
जैसे-जैसे चुनाव का समय करीब आ रहा है, यूसीसी जैसे राष्ट्रीय मुद्दे अब क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक दलों के पाला बदलने और बयानों की जंग का मुख्य हथियार बनते जा रहे हैं। तेजस्वी यादव की यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है और इसका जेडीयू के आंतरिक समीकरणों पर कितना असर पड़ता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस बयानबाजी ने बिहार के राजनीतिक तापमान को एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है।