प्रशांत किशोर का वो दांव, जिसने तीन दशक पुराना बीजेपी का अजेय दुर्ग ध्वस्त कर दिया

प्रशांत किशोर का वो दांव, जिसने तीन दशक पुराना बीजेपी का अजेय दुर्ग ध्वस्त कर दिया

बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात में हुए 2026 के उपचुनावों के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए मिश्रित तस्वीर पेश की है। पार्टी को बिहार की चर्चित बांकीपुर सीट पर जन सूरज के संस्थापक प्रशांत किशोर से हार का सामना करना पड़ा, जबकि मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। हालांकि, गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा अपने पास बनाए रखने में सफल रही।

इन नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की बांकीपुर सीट की रही, जहां भाजपा का तीन दशक पुराना मजबूत गढ़ पहली बार ढह गया।

31 साल बाद बांकीपुर में बदला राजनीतिक समीकरण

बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा 1995 से लगातार जीत दर्ज करती आ रही थी। यह सीट लंबे समय तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का राजनीतिक गढ़ भी मानी जाती रही है। ऐसे में इस सीट पर मिली हार को पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नतीजे ने बिहार की बदलती चुनावी राजनीति का संकेत भी दिया है, जहां मतदाताओं ने इस बार अलग फैसला सुनाया।

भाजपा की हार के पीछे क्या रहे प्रमुख कारण?

बांकीपुर में भाजपा की हार के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे प्रमुख कारण पार्टी का अत्यधिक आत्मविश्वास माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि बांकीपुर सीट पर चाहे कोई भी उम्मीदवार मैदान में हो, जीत भाजपा की ही होगी।

जन सूरज ने इसी मुद्दे को चुनाव प्रचार का हिस्सा बनाया और कार्यकर्ताओं ने लगातार भाजपा के इस आत्मविश्वास को जनता के बीच मुद्दा बनाकर पेश किया।

उम्मीदवार बदलने की रणनीति भी बनी चर्चा

चुनाव के दौरान भाजपा की उम्मीदवार चयन रणनीति भी सवालों के घेरे में रही। पार्टी ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ 'बंटी' को उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन बाद में उनकी जगह नीरज कुमार को टिकट दे दिया।

आधिकारिक तौर पर अभिषेक सिन्हा ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए नामांकन वापस लेने की बात कही थी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, उनके परिवार का नाम चर्चित चारा घोटाले से जुड़ने के कारण भाजपा ने अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने का फैसला किया।

सूत्रों का दावा है कि अभिषेक सिन्हा के पिता रविंद्र प्रसाद चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराए गए थे। उन पर सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी बिलों के जरिए सरकारी धन के गबन का आरोप था। वर्ष 2022 में सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में कई आरोपियों के साथ उन्हें भी दोषी ठहराया था।

प्रशांत किशोर ने जमीनी अभियान पर लगाया पूरा जोर

जहां भाजपा चुनावी जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दी, वहीं प्रशांत किशोर ने पूरी ताकत जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में लगाई। जन सूरज के कार्यकर्ताओं को लगातार घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करने और स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के निर्देश दिए गए।

चुनाव प्रचार के दौरान जन सूरज के कार्यकर्ताओं को बांकीपुर में नालों की सफाई करते हुए भी देखा गया। पार्टी ने इसे जनता से सीधे जुड़ने का माध्यम बनाया और स्थानीय मुद्दों को चुनाव के केंद्र में रखा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसी जमीनी रणनीति ने मतदाताओं के बीच जन सूरज की स्वीकार्यता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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