बिहार के किसानों को बैकअप देने पहुंचे राकेश टिकैत

बिहार के किसानों को बैकअप देने पहुंचे राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और देश के जाने-माने किसान नेता राकेश टिकैत के बिहार दौरे को लेकर इस वक्त देश की राजनीति और कृषि जगत से एक बड़ी और बेहद अहम खबर सामने आ रही है। बिहार के नवादा (Nawada) जिले में इन दिनों किसानों और स्थानीय प्रशासन के बीच जमीन अधिग्रहण, उचित मुआवजे और विस्थापन के मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जिसके समर्थन में और किसानों को एक मजबूत कानूनी व राजनीतिक बैकअप देने के लिए राकेश टिकैत ने नवादा की धरती पर कदम रख दिया है। पिछले कुछ हफ्तों से नवादा और आसपास के इलाकों में विकास परियोजनाओं और अन्य औद्योगिक कारणों से किसानों की उपजाऊ जमीनों के अधिग्रहण को लेकर जिस प्रकार का असंतोष पनप रहा था, उसने अब एक बड़े किसान आंदोलन का रूप ले लिया है। किसानों की इन्हीं समस्याओं को आवाज देने और सरकार तक उनकी बात पहुंचाने के लिए बुलाई गई इस महापंचायत में हजारों की संख्या में किसान इकट्ठा हुए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि राकेश टिकैत के इस बिहार दौरे के पीछे की मुख्य वजह क्या है और नवादा में अचानक महापंचायत बुलाने की असली नौबत क्यों आई।

क्या है नवादा में किसानों के असंतोष और महापंचायत की मुख्य वजह: जमीन अधिग्रहण और मुआवजे का विवाद

नवादा जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में पिछले दिनों से यह सुगबुगाहट तेज थी कि किसानों की सहमति के बिना या उन्हें उनकी जमीन का बाजार मूल्य के हिसाब से उचित मुआवजा दिए बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। किसानों का यह आरोप है कि प्रशासन द्वारा उन्हें जो मुआवजा राशि दी जा रही है, वह आज के समय में बेहद कम है, जिससे उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी और जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, विस्थापित होने वाले परिवारों के पुनर्वास को लेकर भी कोई ठोस नीति स्पष्ट नहीं की गई है, जिसके चलते किसानों में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय स्तर पर कई दिनों तक चली वार्ताओं के बेनतीजा रहने के बाद जब किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई, तो संयुक्त किसान मोर्चे और स्थानीय किसान संगठनों ने मिलकर इस भव्य महापंचायत का आयोजन किया और देश के बड़े किसान नेता राकेश टिकैत को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया।

राकेश टिकैत का बिहार सरकार पर तीखा हमला: किसानों के हक की लड़ाई में सड़क से संसद तक संघर्ष का ऐलान

नवादा की इस विशाल किसान महापंचायत में पहुंचते ही राकेश टिकैत ने अपने तीखे तेवरों से प्रशासन और सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश का अन्नदाता अपनी पसीने की कमाई से सींची गई उपजाऊ जमीन को औने-पौने दामों पर किसी भी कीमत पर नहीं बिकने देगा। टिकैत ने बिहार सरकार और स्थानीय प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों की मांगों को समय रहते नहीं माना गया और बलपूर्वक जमीन हथियाने की कोशिश की गई, तो इस आंदोलन को पूरे बिहार राज्य में और अधिक आक्रामक तरीके से फैलाया जाएगा। उन्होंने किसानों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर की तर्ज पर अब बिहार के किसानों को भी अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर कानूनी और वैधानिक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहना होगा, और भारतीय किसान यूनियन हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

बिहार की राजनीति पर पड़ेगा इस आंदोलन का क्या असर: चुनावी राज्य में किसानों का मुद्दा बना बड़ा सियासी हथियार

राकेश टिकैत के नवादा दौरे और इस महापंचायत के आयोजन ने केवल प्रशासनिक हलकों में ही नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक पार्टियों में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए किसानों की मांगों का समर्थन करना शुरू कर दिया है, जिससे यह स्थानीय मुद्दा अब एक बड़ा राज्यस्तरीय राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले समय में जब राजनीतिक दल जनता के बीच जाएंगे, तो किसानों का यह असंतोष और जमीन अधिग्रहण का पेच एक बहुत बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है। फिलहाल, नवादा जिला प्रशासन इस महापंचायत के बाद सतर्क हो गया है और किसानों के प्रतिनिधियों के साथ एक नए दौर की उच्चस्तरीय बातचीत की तैयारी कर रहा है, ताकि शांतिपूर्ण तरीके से इस विवाद का कोई स्वीकार्य समाधान निकाला जा सके।