बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के 30 दिन पूरे 11 नई टाउनशिप और हर ब्लॉक में मॉडल स्कूल समेत लिए ये 7 बड़े  फैसले

बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के 30 दिन पूरे 11 नई टाउनशिप और हर ब्लॉक में मॉडल स्कूल समेत लिए ये 7 बड़े फैसले

बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए (NDA) सरकार ने अपने कार्यकाल का सफल एक महीना पूरा कर लिया है। बीते 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही सम्राट चौधरी पूरे एक्शन मोड में दिखाई दे रहे हैं। सुशासन, न्याय के साथ विकास और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने शुरुआती 30 दिनों के भीतर ही कई कैबिनेट बैठकों में 7 ऐसे बड़े और दूरगामी फैसले लिए हैं, जो राज्य की सूरत बदलने का माद्दा रखते हैं। बुनियादी ढांचे (Infrastructure) से लेकर शिक्षा और महिला सुरक्षा तक, सरकार के इन फैसलों में नए बिहार का विजन साफ नजर आ रहा है।

10 जिलों में बसेंगे 11 चमचमाते ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप

बिहार के बड़े शहरों पर आबादी और वाहनों के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार ने 11 नए 'ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप' (Greenfield Satellite Townships) विकसित करने की महायोजना को मंजूरी दी है। लगभग 800 से 1200 एकड़ में शुरू होने वाले ये नए शहर अत्याधुनिक आवासीय कॉलोनियों, चौड़ी सड़कों, पार्कों और कमर्शियल जोन से लैस होंगे। सरकार ने इन क्षेत्रों के मास्टर प्लान तैयार होने तक जमीन की खरीद-बिक्री और अवैध निर्माण पर 30 जून 2027 तक के लिए रोक लगा दी है।

इन नामों से जाने जाएंगे बिहार के ये 11 नए शहर:

  • पटना में पाटलिपुत्र

  • सोनपुर में हरिहरनाथपुर

  • गया में मगध

  • दरभंगा में मिथिला

  • सहरसा में कोसी

  • पूर्णिया में पूर्णिया

  • मुंगेर में अंग

  • सीतामढ़ी में सीतापुरम

  • भागलपुर में विक्रमशिला

  • मुजफ्फरपुर में तिरहुत

  • छपरा में सारण

शिक्षा क्रांति: हर प्रखंड में मॉडल स्कूल और नए डिग्री कॉलेज

शिक्षा व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने ₹800 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य के सभी जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड (Block) के एक चयनित उच्च माध्यमिक विद्यालय को सर्वसुविधायुक्त 'मॉडल स्कूल' के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इसके अलावा, जिन 208 ब्लॉकों में अब तक एक भी डिग्री कॉलेज नहीं था, वहां नए डिग्री कॉलेज खोलने के लिए ₹104 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और भारी-भरकम फीस पर कड़ा शिकंजा

अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर पूरी तरह से लगाम लगा दी है। नए नियमों के मुताबिक, सभी प्राइवेट स्कूलों को अपनी पूरी फीस संरचना (Fee Structure) को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। कोई भी स्कूल प्रबंधन मनमाने ढंग से फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा। साथ ही, अभिभावक अपनी पसंद के किसी भी वेंडर से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे। फीस बकाया होने की स्थिति में कोई भी स्कूल छात्र को परीक्षा में बैठने से नहीं रोक पाएगा।

बेटियों की सुरक्षा के लिए आ गई 'पुलिस दीदी स्कीम'

महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सरकार ने एक बेहद अनूठी 'पुलिस दीदी योजना' (Police Didi Scheme) की शुरुआत की है। इस योजना के तहत महिला पुलिस कर्मियों के लिए विशेष रूप से 1,500 स्कूटर्स खरीदे जा रहे हैं। ये 'पुलिस दीदी' अधिकारी और जवान राज्य के सभी प्रमुख स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के आसपास नियमित रूप से गश्त (पेट्रोलिंग) करेंगी ताकि छेड़खानी, महिला अपराध और मनचलों पर तुरंत नकेल कसी जा सके।

जनसमस्याओं के समाधान के लिए 'सहयोग की त्रिवेणी'

आम जनता की शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निपटारे के लिए सरकार ने तीन-स्तरीय व्यवस्था 'सहयोग की त्रिवेणी' को अमलीजामा पहनाया है। इसमें सहयोग हेल्पलाइन नंबर (1100), सहयोग पोर्टल (sahyog.bihar.gov.in) और पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले सहयोग शिविर शामिल हैं। ब्लॉक, पुलिस स्टेशन और राजस्व कार्यालयों से जुड़ी शिकायतों को 30 दिनों के भीतर सुलझाना अनिवार्य कर दिया गया है। तय समय में काम न करने वाले अधिकारियों पर निलंबन (सस्पेंशन) जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

लोकल बिजनेस को बढ़ावा: ₹50 करोड़ तक के टेंडर्स में बिहारी ठेकेदारों को प्राथमिकता

बिहार के स्थानीय युवाओं को रोजगार और व्यापार के अधिक अवसर देने के लिए बिहार पब्लिक वर्क्स कोड (Bihar Public Works Code) में बड़ा संशोधन किया गया है। अब राज्य सरकार के ₹50 करोड़ रुपये तक के सभी सिविल कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स और टेंडर्स में बिहार के स्थानीय और राज्य-स्तरीय ठेकेदारों (Local Contractors) को प्राथमिकता दी जाएगी। इस फैसले से राज्य का पैसा राज्य के भीतर ही रहेगा और स्थानीय स्तर पर बंपर रोजगार सृजित होंगे।

पेपरलेस ई-रजिस्ट्रेशन और बुजुर्गों को होम डिलीवरी की सुविधा

जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री में होने वाले भ्रष्टाचार और दलाली को खत्म करने के लिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल यानी पेपरलेस ई-रजिस्ट्रेशन (e-Registration) में बदल दिया है। इसके अलावा, बिहार के ऐसे बुजुर्ग नागरिक जिनकी उम्र 80 वर्ष या उससे अधिक है, उन्हें अब जमीन की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। सरकार मोबाइल यूनिट के जरिए उनके घर पहुंचकर 'डोरस्टेप प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन' (Doorstep Registration) की सुविधा मुफ्त प्रदान करेगी।

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