Sasaram Sadar Hospital News: खुद बीमार पड़ा सासाराम सदर अस्पताल! लाखों-करोड़ों की व्यवस्था फेल, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करने को मजबूर दिखे डॉक्टर

Sasaram Sadar Hospital News: खुद बीमार पड़ा सासाराम सदर अस्पताल! लाखों-करोड़ों की व्यवस्था फेल, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करने को मजबूर दिखे डॉक्टर

बिहार के स्वास्थ्य विभाग के दावों और अस्पतालों की बदहाली की पोल खोलती एक बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक तस्वीर रोहतास जिले के मुख्यालय सासाराम सदर अस्पताल से सामने आई है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार भले ही लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी भगवान भरोसे ही चल रही है। ताजा मामला सासाराम सदर अस्पताल का है, जहां बिजली गुल होने और जनरेटर जैसी बैकअप व्यवस्था फेल होने के कारण डॉक्टरों को मोबाइल की फ्लैशलाइट (टॉर्च) की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा। आइए जानते हैं क्या है इस पूरी घटना की हकीकत।

क्या है पूरा मामला? अंधेरे में डूबा सदर अस्पताल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सासाराम के सदर अस्पताल में अचानक बिजली गुल हो गई थी। अस्पताल परिसर में बिजली कटते ही चारों तरफ अंधेरा छा गया। आमतौर पर ऐसे आपातकालीन मामलों और बड़े अस्पतालों में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए जनरेटर या इनवर्टर की ऑटोमेटिक व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की भारी लापरवाही के चलते बैकअप सिस्टम काम नहीं कर सका।

  • मोबाइल टॉर्च बनी सहारा: अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे गंभीर मरीजों और घायलों को जब तुरंत चिकित्सीय सहायता की जरूरत थी, तब वार्ड और इमरजेंसी रूम में अंधेरा होने के कारण डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को मजबूरी में अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलानी पड़ी।

  • परिजनों का फूटा गुस्सा: अस्पताल की इस लचर व्यवस्था को देखकर वहां मौजूद मरीजों और उनके तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालय के मुख्य अस्पताल में मामूली बिजली कटने पर भी इलाज के लाले पड़ जाते हैं।

लाखों-करोड़ों के बजट पर बड़ा सवाल

सासाराम सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर हर साल सरकार द्वारा भारी-भरकम बजट खर्च किया जाता है, ताकि मरीजों को बेहतर और आधुनिक इलाज मिल सके। इसके बावजूद आए दिन दवाइयों की कमी, डॉक्टरों की लाचारी और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मोबाइल की रोशनी में टांके लगाने और दवा लिखने जैसी घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क है।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे सवाल

इस वायरल और सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों ने जिला प्रशासन और सिविल सर्जन से मांग की है कि इस पूरी लापरवाही के लिए जिम्मेदार अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज की जान के साथ इस तरह का खिलवाड़ न हो सके।

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