JDU में आर-पार! अनंत सिंह और नीरज कुमार में जुबानी जंग, शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी से सियासी हलचल तेज
बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव की सुगबुगाहट के बीच सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर घमासान तेज हो गया है। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के बीच राजनीतिक तकरार अब तीखे व्यक्तिगत हमलों में बदल चुकी है।
अनंत सिंह ने जहां नीरज कुमार पर साजिश रचकर जेल भिजवाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है, वहीं नीरज कुमार ने पलटवार करते हुए अनंत सिंह को अपराधियों का पैरोकार करार दिया है। इस तीखी खींचतान ने पार्टी के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और 18 साल के राजनीतिक करियर में पहली बार नीरज कुमार संगठन में अलग-थलग पड़ते दिखाई दे रहे हैं।
अनंत सिंह के तीखे आरोप और 20 करोड़ की खुली चुनौती
मोकामा विधायक अनंत सिंह ने सीधा वार करते हुए दावा किया कि पूर्व में उन्हें जेडीयू छोड़ने के लिए नीरज कुमार ने ही मजबूर किया था। अनंत सिंह का आरोप है कि उनके पैतृक आवास पर एके-47 रखवाने और पूरे षड्यंत्र के पीछे नीरज कुमार की भूमिका थी, जिसे वे सबूतों के साथ साबित कर सकते हैं। राजनीतिक रस्साकशी को आगे बढ़ाते हुए अनंत सिंह ने हार-जीत को लेकर 20 करोड़ रुपये की बाजी लगाने और पटना के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में आमने-सामने खुली बहस करने की चुनौती भी दे डाली।
नीरज कुमार का करारा पलटवार: 'बेऊर जेल का संत' बताया
अनंत सिंह के तीखे हमलों के जवाब में विधान पार्षद नीरज कुमार ने भी तीखा रुख अपनाया। नीरज कुमार ने अनंत सिंह पर तंज कसते हुए उन्हें 'बेऊर जेल का संत' कहा और आरोप लगाया कि वे वारंटियों और फरार अपराधियों को साथ लेकर घूम रहे हैं। नीरज ने कहा कि अनंत सिंह पार्टी के फैसलों पर सवाल उठाकर खुद जेडीयू को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। एके-47 के आरोप पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि यदि उनके पास कोई ठोस साक्ष्य हैं, तो मीडिया में बयानबाजी करने के बजाय सीधे अदालत का रुख करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे धनबल या बाहुबल की सियासत नहीं करते, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता के भरोसे चुनावी मैदान में उतरते हैं।
2008 से लगातार विधान परिषद में नीरज कुमार का सफर
नीरज कुमार वर्ष 2008 से लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। वे पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए तीन बार जीत हासिल कर चुके हैं और अब चौथी बार उच्च सदन पहुंचने की तैयारी में हैं। उनका पहला कार्यकाल मई 2008 से मई 2014 तक रहा, दूसरा कार्यकाल मई 2014 से 2020 तक रहा, जबकि तीसरा कार्यकाल नवंबर 2020 से नवंबर 2026 तक निर्धारित है। अपने रुख को स्पष्ट करते हुए नीरज कुमार ने कहा कि वे बचपन से नीतीश कुमार के साथ खड़े रहे हैं, जबकि कई लोग पाला बदलते रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि पार्टी उन्हें टिकट देगी तो वे चुनाव अवश्य लड़ेंगे, वे हर चुनौती के लिए तैयार हैं लेकिन अपना चरित्र हनन बर्दाश्त नहीं करेंगे।
नीतीश, निशांत और बड़े नेताओं की चुप्पी से चर्चाएं तेज
इस सियासी तकरार के बीच जेडीयू के शीर्ष स्तर पर पसरा सन्नाटा सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके पुत्र निशांत कुमार ने इस पूरे विवाद पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। उधर, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा 'वेट एंड वॉच' की मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। ललन सिंह ने पार्टी में किसी भी प्रकार की गुटबाजी से इनकार करते हुए कहा कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से होते हैं, हालांकि विवाद से जुड़े सीधे सवालों पर वे असहज नजर आए। वहीं कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इसे संगठन का आंतरिक और सामान्य मतभेद बताते हुए दावा किया कि मामला नेतृत्व के संज्ञान में है और पूरी पार्टी नीतीश कुमार के नेतृत्व में एकजुट है।