BJP और NDA के बागी नेताओं को नामांकन वापस लेने की कड़ी चेतावनी

BJP और NDA के बागी नेताओं को नामांकन वापस लेने की कड़ी चेतावनी

बिहार की सियासत में आगामी विधान परिषद (MLC) चुनावों की सरगर्मी के बीच सत्ताधारी एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर घमासान चरम पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई गई एनडीए विधानमंडल दल की एक उच्चस्तरीय और महत्वपूर्ण बैठक में सूबे के नेतृत्व ने बागी तेवर अपना रहे नेताओं को लेकर बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या कड़क मिजाज के लिए पहचाने जाने वाले नेता अब घर के भीतर बगावत कर रहे नेताओं पर बड़ा हंटर चलाने की तैयारी में हैं। बैठक के दौरान साफ शब्दों में यह संदेश दे दिया गया है कि गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ जाकर काम करने वाले या परोक्ष रूप से विरोधियों का समर्थन करने वाले किसी भी नेता को बख्शा नहीं जाएगा। यदि समय रहते बागी नेताओं ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे और नामांकन वापस नहीं लिया, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए पार्टी और विधायकी की सदस्यता तक पर गाज गिर सकती है।

सीएम आवास की महाबैठक में डैमेज कंट्रोल पर मंथन, आठों सीटों पर एनडीए की एकजुटता का कड़ा संदेश

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले आगामी चुनावों को लेकर एनडीए नेतृत्व किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस महाबैठक में बीजेपी और जेडीयू सहित सभी घटक दलों के प्रमुख नेताओं, मंत्रियों और विधायकों को बुलाया गया था ताकि चुनाव से पहले अंदरूनी कलह को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके। बैठक की अध्यक्षता करते हुए शीर्ष नेताओं ने दो टूक कहा कि इस समय पार्टी या व्यक्तिगत नाराजगी से ऊपर उठकर गठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करना हर कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। पिछले कुछ दिनों से मोकामा और अन्य क्षेत्रों में जिस तरह से पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बागी तेवर दिखाए जा रहे थे, उसने संगठन की चिंता काफी बढ़ा दी थी। इसी सुगबुगाहट को थामने के लिए इस हाई-प्रोफाइल बैठक को बुलाया गया था ताकि मतदान से पहले सारे गिले-शिकवे दूर किए जा सकें।

बागी तेवर पर अड़े बाहुबली विधायक अनंत सिंह, चेतावनी के बावजूद अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं

एक तरफ जहां मुख्यमंत्री और एनडीए के शीर्ष नेता अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे हैं और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह अपने पुराने तेवर में बिल्कुल भी नरमी लाते नजर नहीं आ रहे हैं। एनडीए की इस उच्चस्तरीय बैठक में शामिल होने के बाद जब अनंत सिंह बाहर आए और मीडियाकर्मियों से मुखातिब हुए, तो उन्होंने साफ कर दिया कि वे अपने फैसलों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि वे अपनी पसंद और वचनों के मुताबिक ही समर्थन जारी रखेंगे। नेतृत्व की तमाम वार्निंग के बावजूद बागी नेताओं के इस तरह अड़ियल रुख अपनाने से राजनीतिक पारा काफी हाई हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इन असंतुष्ट चेहरों को नहीं मनाया गया, तो चुनाव परिणाम के दौरान गठबंधन को अंदरखाने बड़ा झटका लग सकता है।

विधानसभा चुनाव से पहले लिटमस टेस्ट बना यह एमएलसी चुनाव, देखना होगा नेतृत्व का अगला कदम

बिहार की राजनीति में विधान परिषद के ये चुनाव आने वाले बड़े राजनीतिक भविष्य और विधानसभा समीकरणों के लिहाज से एक बड़े लिटमस टेस्ट के रूप में देखे जा रहे हैं। एनडीए का मुख्य लक्ष्य इन सभी आठों सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाना है। ऐसे में अपनों की बगावत और भीतरघात की आशंका से जूझना गठबंधन के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चेतावनी की मियाद पूरी होने के बाद क्या वाकई शासन और संगठन के स्तर पर कोई बड़ा और कड़ा प्रशासनिक या राजनीतिक एक्शन देखने को मिलता है या फिर कूटनीतिक समझौतों के जरिए इस विवाद को शांत किया जाता है। फिलहाल, बिहार के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आने वाले कुछ घंटे राज्य की राजनीति में बहुत बड़ा भूचाल ला सकते हैं।