पटना में फूटा छात्रों का गुस्सा: 1799 दारोगा भर्ती रद्द करने की मांग, जेपी गोलंबर पर पुलिस से झड़प; CM हाउस घेराव की तैयारी
बिहार की राजधानी पटना की सड़कें एक बार फिर छात्र आंदोलन की आग में तप उठी हैं। ऐतिहासिक गांधी मैदान में जुटे हजारों प्रतियोगी छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
प्रदर्शनकारी दारोगा भर्ती परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग पर अड़े हैं। इस विरोध मार्च के दौरान जेपी गोलंबर के पास स्थिति उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गई जब आगे बढ़ रहे छात्रों और तैनात पुलिस बल के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प देखने को मिली।
27 मई की परीक्षा और पेपर लीक के गंभीर आरोप
सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि 27 मई को आयोजित हुई 1799 पदों वाली बिहार दारोगा भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक हुआ है। उनका कहना है कि मेहनत करने वाले युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है, इसलिए इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को सिरे से निरस्त किया जाना ही एकमात्र न्यायसंगत रास्ता है।
सीएम आवास घेरने की तैयारी, कई दिनों से जारी अनशन
आक्रोशित अभ्यर्थियों ने आंदोलन को और तेज करते हुए मंगलवार 15 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास के घेराव का बड़ा ऐलान कर दिया है। अपनी इस मांग को लेकर पटना में छात्र पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल, अनशन और शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे, लेकिन सुनवाई न होने के कारण अब आंदोलन उग्र रूप ले चुका है।
EOU के राडार पर 301 रिजल्ट, आयोग से मांगा जवाब
इस पूरे प्रकरण में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) पहले से ही धांधली के इनपुट पर गहराई से जांच कर रही है। जांच एजेंसियों के मुताबिक 79 अलग-अलग कतारों व कमरों में बैठे कुल 301 अभ्यर्थियों के नतीजे सीधे तौर पर संदेह के घेरे में हैं। इसके साथ ही गया और पूर्णिया जिलों के परीक्षा केंद्रों से सामने आई गड़बड़ियों को लेकर EOU ने संबंधित आयोग को नोटिस जारी कर सभी बिंदुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण तलब किया है।
छात्रों की तीन प्रमुख मांगें
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परीक्षाएं रद्द हों: 1799 पदों की दारोगा मुख्य परीक्षा और 70वीं BPSC परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं के चलते इन्हें तुरंत रद्द किया जाए।
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लंबित भर्ती पूरी हो: बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) की वर्षों से अटकी और लटकी हुई परीक्षाओं का आयोजन बिना देरी किए कराया जाए।
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पारदर्शिता और उच्चस्तरीय जांच: राज्य की तमाम बहाली प्रक्रियाओं में फुलप्रूफ पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और गड़बड़ियों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच हो।