इतना बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान और वो भी बड़े आराम से! पश्चिम चंपारण के डीएम तरनजोत सिंह ने कायम की मिसाल
बिहार के प्रशासनिक गलियारों और आम जनता के बीच इस समय पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी (डीएम) तरनजोत सिंह की कार्यशैली की जमकर तारीफ हो रही है। अमूमन जब भी कहीं बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाता है, तो वहां भारी बवाल, विरोध-प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बिगड़ने जैसी तस्वीरें सामने आती हैं। लेकिन पश्चिम चंपारण जिले में एक बेहद विशाल अतिक्रमण हटाओ अभियान को जिस शांतिपूर्ण और सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, उसने पूरे सूबे के सामने एक बेहतरीन नजीर पेश की है।
बिना लाठी-डंडे और बिना बवाल के खाली हुई सरकारी जमीन
पश्चिम चंपारण जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए इस महा-अभियान के तहत सरकारी जमीनों और मुख्य रास्तों से अवैध कब्जों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। हैरान करने वाली बात यह रही कि इतने बड़े स्तर पर हुई कार्रवाई के दौरान न तो कहीं पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और न ही स्थानीय लोगों की तरफ से कोई उग्र विरोध देखने को मिला। डीएम तरनजोत सिंह की दूरदर्शी सोच और सटीक प्रशासनिक तालमेल की वजह से यह पूरा ऑपरेशन बेहद 'स्मूथ' और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया।
'दबंगई' पर भारी पड़ी डीएम तरनजोत सिंह की खास रणनीति
इस अभियान को बिना किसी हंगामे के सफल बनाने के पीछे जिला प्रशासन की एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही थी। दरअसल, अतिक्रमण हटाने के लिए सीधे बुलडोजर भेजने के बजाय, प्रशासनिक टीमों ने पहले संबंधित इलाकों में जाकर लोगों से संवाद किया। जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पहले बकायदा मुनादी कराई गई, कानूनी नोटिस दिए गए और लोगों को खुद से अतिक्रमण हटाने का पर्याप्त समय दिया गया। इसके साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों को भी इस अभियान के महत्व को समझाने के लिए शामिल किया गया, जिससे विरोध की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई।
पूरे बिहार के प्रशासनिक हल्के में हो रही इस मॉडल की चर्चा
पश्चिम चंपारण का यह 'नो-कॉन्फ्लिक्ट' (बिना टकराव वाला) अतिक्रमण मॉडल अब राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक सीख बन गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'कानून के राज' और सुशासन के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए डीएम तरनजोत सिंह ने यह साबित कर दिया है कि अगर प्रशासनिक नीयत साफ हो और जनता के साथ संवाद का रास्ता खुला हो, तो बड़े से बड़े और जटिल से जटिल काम को भी बिना किसी विवाद के अमलीजामा पहनाया जा सकता है।