खेत में घुसा था मवेशी, पीट-पीटकर ले ली जान; 16 साल बाद हत्यारे मां-बेटे को उम्रकैद
बिहार के नवादा (Nawada) जिले से न्याय प्रणाली पर भरोसा मजबूत करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। नवादा व्यवहार न्यायालय ने 16 साल पुराने एक चर्चित हत्याकांड का निपटारा करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने हत्या के इस संगीन मामले में आरोपी मां और उसके बेटे को दोषी मानते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सख्त सजा मुकर्रर की है।
क्या था पूरा मामला? खेत में मवेशी घुसने पर हुआ था खूनी खेल
यह दर्दनाक घटना 8 सितंबर 2010 को नवादा के सिरदला थाना क्षेत्र के मोहगाय गांव में घटी थी। जानकारी के मुताबिक, गांव के रहने वाले कृष्णा चौधरी का मवेशी गलती से रंजीत कुमार के खेत में चला गया था। इसी छोटी सी बात पर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते इस मामूली विवाद ने इतना हिंसक रूप ले लिया कि आरोपी रंजीत और उसकी मां जयमंती देवी ने कृष्णा चौधरी की लाठी-डंडों से बेरहमी से पिटाई कर दी।
इलाज के दौरान तोड़ा था दम, पुलिस ने जुटाए पुख्ता सबूत
इस जानलेवा हमले में कृष्णा चौधरी बुरी तरह से घायल हो गए थे। परिजन उन्हें तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल लेकर गए, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि इलाज के दौरान कृष्णा ने दम तोड़ दिया। मौत के बाद पुलिस ने सिरदला थाने में कांड संख्या 139/2010 के तहत एफआईआर दर्ज की और मामले की गहन जांच शुरू की। पुलिस ने अपनी जांच में ठोस साक्ष्य जुटाए और अदालत में मजबूत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया।
एडीजे-2 उपेंद्र कुमार की अदालत ने सुनाया न्याय
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-2) उपेंद्र कुमार की अदालत में चल रही थी। करीब 16 सालों तक चली इस लंबी कानूनी लड़ाई में अभियोजन पक्ष ने कई अहम गवाह और सबूत पेश किए।
अदालत ने पुलिस की विस्तृत जांच रिपोर्ट और गवाहों के विश्वसनीय बयानों के आधार पर दोनों अभियुक्तों— जयमंती देवी और रंजीत कुमार को हत्या का पूर्ण रूप से दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इस बहुप्रतीक्षित फैसले के दिन नवादा कोर्ट परिसर में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। पीड़ित परिवार ने अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की बड़ी जीत बताया है।