पलटने वाला है बिहार का सियासी पासा, उपचुनाव से ठीक पहले सम्राट चौधरी के घर पहुंचे आरजेडी सांसद

पलटने वाला है बिहार का सियासी पासा, उपचुनाव से ठीक पहले सम्राट चौधरी के घर पहुंचे आरजेडी सांसद

बिहार की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। औरंगाबाद लोकसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद अभय कुशवाहा ने बुधवार को पटना में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक आवास पर उनसे मुलाकात की। देश में विपक्षी खेमे के भीतर चल रही सियासी उठापटक के बीच हुई इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद बिहार में दलबदल और नए समीकरणों को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

केवल विकास के मुद्दों पर 'शिष्टाचार भेंट': मुख्यमंत्री कार्यालय

इस संवेदनशील मुलाकात को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच आधिकारिक तौर पर इसे एक सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है। सरकार से जुड़े सूत्रों और उपमुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार यह बैठक विशुद्ध रूप से एक शिष्टाचार मुलाकात थी और इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव से ठीक पहले इस मुलाकात का समय कई बड़े सियासी इशारे कर रहा है।

आरजेडी ने अफवाहों को किया खारिज, दी सफाई

अपनी पार्टी के सांसद की भाजपा के सबसे कद्दावर नेताओं में शुमार सम्राट चौधरी से मुलाकात पर आरजेडी तुरंत एक्टिव हो गई है। आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने इन तमाम कयासों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सांसद अभय कुशवाहा केवल अपने औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों और स्थानीय जनसमस्याओं को लेकर उपमुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के सांसदों का जनहित में सरकार के मंत्रियों से मिलना एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसे राजनीतिक रंग देना बिल्कुल गलत है।

देश भर में विपक्षी दलों में मची भगदड़ के बीच बढ़ी चिंता

आरजेडी की सफाई के बावजूद राजनीतिक पंडित इस बैठक को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं क्योंकि देश भर में विपक्षी दलों के भीतर बड़ी टूट की खबरें लगातार आ रही हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई सांसदों के बागी रुख अपनाने और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के पाला बदलने की चर्चाओं के बीच विपक्ष पूरी तरह सतर्क है। माना जा रहा है कि कई क्षेत्रीय दलों के नेता सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के संपर्क में हैं, जिससे इस मुलाकात का वजन और बढ़ गया है।

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