कौन हैं CO दीपक कुमार जिन पर वैशाली नाव हादसे की गिरी गाज, डीएम वर्षा सिंह ने हटाया

कौन हैं CO दीपक कुमार जिन पर वैशाली नाव हादसे की गिरी गाज, डीएम वर्षा सिंह ने हटाया

बिहार के वैशाली जिले से हाल ही में सामने आए एक अत्यंत दर्दनाक और झकझोर देने वाले नाव हादसे ने पूरे राज्य को मातम में डुबो दिया है। जिले के राघोपुर इलाके में गंगा नदी में एक नाव पलटने से एक ही परिवार के बच्चों समेत कुल 13 मासूमों की जान चली गई। इस भीषण हादसे के बाद जहाँ एक तरफ पीड़ित परिवारों के रोने-बिलखने से पूरा इलाका गमगीन है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी गाज गिरनी शुरू हो गई है। वैशाली की जिलाधिकारी (DM) आईएएस वर्षा सिंह ने इस दर्दनाक हादसे में प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता को बेहद गंभीरता से लेते हुए राघोपुर के अंचलाधिकारी (CO) दीपक कुमार को उनके पद से हटा दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर यह CO दीपक कुमार कौन हैं और उन पर पहले से क्या-क्या आरोप रहे हैं। आइए एक ग्राउंड और इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि इस प्रशासनिक कार्रवाई और राघोपुर नाव हादसे की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है।

कौन हैं CO दीपक कुमार और क्यों राघोपुर नाव हादसे के बाद गिरी उन पर गाज?

वैशाली जिले के राघोपुर अंचल में बतौर अंचलाधिकारी (CO) तैनात रहे दीपक कुमार लंबे समय से अपने कामकाज और कार्यशैली को लेकर चर्चा और विवादों में रहे हैं। राघोपुर एक ऐसा नदी-तटीय और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है जहाँ आवागमन के लिए नाव ही मुख्य साधन होती है। ऐसे संवेदनशील इलाके में सुरक्षा मानकों की निगरानी करना, पुरानी और जर्जर नावों के परिचालन पर रोक लगाना तथा स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक मुस्तैदी बनाए रखना एक सीओ की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। लेकिन, जब हाल ही में राघोपुर के श्यामनंद पंचायत के पास ओवरलोडिंग और जर्जर स्थिति के चलते नाव गंगा नदी में पलट गई और 13 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, तो स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि यदि समय रहते प्रशासनिक अमले ने घाटों और नावों की निगरानी की होती, तो इतनी बड़ी ट्रेजेडी नहीं होती। इस मामले में लापरवाही की गाज सीधे तौर पर तत्कालीन CO दीपक कुमार पर गिरी।

डीएम वर्षा सिंह का कड़ा एक्शन: वेतन रोकने से लेकर पद से हटाने तक का सफर

घटना की सूचना मिलते ही वैशाली की डीएम वर्षा सिंह तुरंत हरकत में आईं और मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। हादसे की भयावहता और जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए डीएम ने सबसे पहले राघोपुर के CO दीपक कुमार और स्थानीय थानेदार का वेतन रोकते हुए उनसे कड़ा स्पष्टीकरण तलब किया था। शुरुआती जांच में जब यह सामने आया कि प्रशासनिक स्तर पर लगातार कोताही बरती जा रही थी और अधिकारियों ने ग्रामीण इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर रुख नहीं अपनाया, तो जिलाधिकारी ने बिना देर किए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया। डीएम वर्षा सिंह ने आदेश जारी करते हुए CO दीपक कुमार को राघोपुर अंचल से तत्काल प्रभाव से हटा दिया। उनकी जगह अब पातेपुर के अंचलाधिकारी प्रभात कुमार को राघोपुर का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है, ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। वहीं, हटाए गए दीपक कुमार को अगले आदेश तक जिला जन शिकायत कोषांग, वैशाली में प्रतिनियुक्त कर दिया गया है।

क्या पहले भी विवादों में रहे हैं CO दीपक कुमार? सामने आए पुराने मामले

यह पहला मौका नहीं है जब CO दीपक कुमार किसी बड़े विवाद या प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में आए हों। इससे पहले भी उनकी कार्यशैली और अनुशासनहीनता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कुछ महीने पहले भी कर्तव्यहीनता के मामलों में उन पर गाज गिर चुकी है। स्थानीय स्तर पर उन पर यह भी आरोप लगते रहे हैं कि वे बिना किसी पूर्व सूचना या मुख्यालय की अनुमति के अपने कार्यक्षेत्र से गायब रहते थे। कुछ समय पूर्व रुस्तमपुर थाना क्षेत्र में एक गंभीर भूमि विवाद के दौरान उनके सामने ही दो पक्ष आपस में बुरी तरह भिड़ गए थे और एक हिंसक झड़प में करीब 15 लोग घायल हो गए थे, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। बार-बार चेताए जाने और शिकायतों के बावजूद उनके कार्यवृत में सुधार न आने के कारण इस बार नाव हादसे जैसी बड़ी घटना के बाद प्रशासन को यह कड़ा और कटीला निर्णय लेना पड़ा।

राघोपुर नाव हादसा और सिस्टम की लापरवाही पर खड़े होते गंभीर सवाल

तेजस्वी यादव के विधानसभा क्षेत्र माने जाने वाले राघोपुर में हुई इस दर्दनाक दुर्घटना ने एक बार फिर से बिहार के ग्रामीण इलाकों में नदी परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। एक तरफ जहां गरीब और मजदूर परिवारों के 13 बच्चे एक सामान्य भोज से लौटते वक्त मौत के मुंह में समा गए, वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों की ऐसी लाचारी और लापरवाही सिस्टम पर एक बड़ा बदनुमा दाग है। पीड़ित माताओं के विलाप और डीएम से लिपटकर रोने के दिल दहला देने वाले दृश्यों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। CO दीपक कुमार को पद से हटाना महज एक प्रशासनिक औपचारिकता या सजा हो सकती है, लेकिन असली न्याय तभी पूरा होगा जब भविष्य के लिए ऐसे पुख्ता इंतजाम किए जाएं कि किसी भी मां को अपने जिगर के टुकड़े इस तरह प्रशासनिक सुस्ती की भेंट न चढ़ाने पड़ें।