उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में क्यों फूटा बगावत का बम, आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने खोली पोल

उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में क्यों फूटा बगावत का बम, आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने खोली पोल

बिहार की सियासत में इन दिनों उठापटक और बगावत के सुरों ने चुनावी तापमान को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। एक तरफ जहां विधान परिषद (MLC) के चुनावों की सुगबुगाहट तेज है, वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख और एनडीए के घटक दल के नेता उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) के घर के भीतर ही पड़ी फूट ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पार्टी के अंदर मचे इस घमासान और विधायकों के बागी तेवर पर अब विपक्षी पार्टी आरजेडी (RJD) के बाहुबली व मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र यादव (Bhai Virendra Yadav) का बेहद तीखा और चटपटा बयान सामने आया है। भाई वीरेंद्र ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में हुई इस बगावत के पीछे 'पति-पत्नी और राजनीति' यानी विशुद्ध परिवारवाद की थ्योरी को जिम्मेदार ठहराया है। उनका साफ कहना है कि जो नेता जीवनभर परिवारवाद के खिलाफ लंबी-चौड़ी बयानबाजी करते रहे, आज वे खुद अपनों को राजनीति में सेट करने में लगे हैं, जिसके चलते पार्टी के अंदर ही उनका विरोध शुरू हो गया है। आइए जानते हैं कि इस सियासी ड्रामे के पीछे की पूरी अंदरूनी कहानी क्या है।

RLM Internal Crisis and MLC Election Drama: पार्टी लाइन से बगावत कर एनडीए उम्मीदवार के खिलाफ उतरे रालोमो के विधायक, सारण सीट पर फंसा पेंच

बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए हो रहे चुनावों के बीच उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा में उस वक्त असहज स्थिति पैदा हो गई जब उनके ही तीन प्रमुख विधायकों ने पार्टी के फरमान और एनडीए की रणनीति को दरकिनार कर दिया। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में एनडीए समर्थित जेडीयू उम्मीदवार के मुकाबले रालोमो के नेताओं और विधायकों ने एक स्वतंत्र उम्मीदवार रामपुकार सिन्हा के नामांकन कार्यक्रम में पहुंचकर खुलकर समर्थन का ऐलान कर दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक आलोक सिंह, विधायक रामेश्वर महतो और माधव आनंद जैसे दिग्गज चेहरों का इस तरह बगावती तेवर अपनाना यह साफ इशारा करता है कि संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा द्वारा पहले ही अनुशासनहीनता की सख्त चेतावनी दिए जाने के बावजूद विधायकों का इस तरह खुलेआम बगावत करना पार्टी के अंदरूनी नेतृत्व और समन्वय पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।

Bhai Virendra Attack on Family Politics: 'वे सिर्फ अपने और परिवार के लिए करते हैं राजनीति', आरजेडी विधायक के बयान से गरमाया बिहार का सियासी बाजार

रालोमो के भीतर मचे इस घमासान पर प्रतिक्रिया देते हुए आरजेडी के तेवरदार विधायक भाई वीरेंद्र यादव ने उपेंद्र कुशवाहा पर जमकर भड़ास निकाली है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में अब ऐसा कोई भी नेता या कार्यकर्ता नहीं बचा है जो उन्हें अपना सच्चा नेता माने। भाई वीरेंद्र ने बहुत तीखे अंदाज में कहा कि जो लोग हमेशा दूसरों पर परिवारवाद का आरोप लगाते थे, वे आज खुद अपनी राजनीति को बचाने और बढ़ाने के लिए केवल अपने परिवार के सदस्यों को सेट करने में जुटे हैं। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि पार्टी के भीतर उपेक्षा का शिकार हो रहे कार्यकर्ता अब इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि वहां सिर्फ 'पति-पत्नी और परिवार' की राजनीति ही प्राथमिकता है। राजद नेता के इस बयान के बाद से बिहार के राजनीतिक गलियारों में बयानों के तीर खूब चल रहे हैं और सत्ता पक्ष के लिए यह अंदरूनी कलह गले की फांस बनती जा रही है।

NDA Coordination and Future Political Impact: एनडीए की एकजुटता पर मंडराया संकट, क्या आपसी कलह और बगावत से कमजोर होगा गठबंधन का चुनावी गणित

विधान परिषद चुनाव के मुहाने पर खड़े बिहार में इस तरह के आंतरिक विद्रोह और विरोधियों के तीखे हमलों का असर सीधे तौर पर चुनावी समीकरणों पर पड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि एनडीए के अन्य घटक दल इस पूरे विवाद से पल्ला झाड़ते हुए इसे उपेंद्र कुशवाहा का अंदरूनी मामला बता रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका नकारात्मक असर गठबंधन की साख पर जरूर पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते राष्ट्रीय लोक मोर्चा के शीर्ष नेतृत्व ने अपने नाराज विधायकों और कार्यकर्ताओं के गिले-शिकवे दूर नहीं किए, तो आने वाले बड़े विधानसभा और अन्य चुनावों में पार्टी का जनाधार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उपेंद्र कुशवाहा इस बग़वत को थामने के लिए क्या नया दांव चलते हैं और बागी विधायक अपने अगले कदम में क्या रुख अख्तियार करते हैं।