सावन की शुरुआत के साथ भक्तिमय हुआ मुजफ्फरपुर: बाबा गरीबनाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, जानें इस 'उत्तर बिहार के देवघर' की पौराणिक मान्यता!

सावन की शुरुआत के साथ भक्तिमय हुआ मुजफ्फरपुर: बाबा गरीबनाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, जानें इस 'उत्तर बिहार के देवघर' की पौराणिक मान्यता!

श्रावण (सावन) मास के शुरू होते ही पूरा मुजफ्फरपुर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा है। उत्तर बिहार के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक बाबा गरीबनाथ मंदिर (Baba Garibnath Dham) में सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करने वाले डाक बम और सामान्य कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है, जिससे पूरा मंदिर परिसर और आसपास का इलाका केसरिया रंग में रंग गया है।

बाबा गरीबनाथ धाम को 'उत्तर बिहार का देवघर' भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो भक्त किन्हीं कारणों से झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) नहीं जा पाते, वे यदि सावन में बाबा गरीबनाथ पर जल अर्पित कर दें, तो उन्हें देवघर के समान ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

जब कुल्हाड़ी लगते ही शिवलिंग से बहने लगी थी दूध की धारा

बाबा गरीबनाथ मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और इसके गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के प्राकट्य की कहानी बेहद चमत्कारी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार:

  • घने जंगलों के बीच था स्थान: सदियों पहले यह पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ था। यहां एक गरीब व्यक्ति रहता था, जिसके पास रहने के लिए एक छोटी सी जमीन थी। उस जमीन पर बरगद का एक विशाल पेड़ था।

  • कुल्हाड़ी का प्रहार: जब उस व्यक्ति ने अपनी आजीविका चलाने या जमीन साफ करने के उद्देश्य से बरगद के पेड़ को काटने के लिए उस पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया, तो एक अचंभित करने वाली घटना घटी। पेड़ की जड़ पर कुल्हाड़ी लगते ही वहां से लाल रंग के रक्त और सफेद दूध की तेज धारा बहने लगी।

  • स्वप्न में आए महादेव: यह देखकर वह व्यक्ति बुरी तरह डर गया और काम रोककर घर लौट आया। उसी रात भगवान शिव ने उसके सपने में आकर दर्शन दिए और कहा कि जिस स्थान पर तुमने प्रहार किया है, वहां भूमि के भीतर मेरा वास है। इसके बाद वहां खुदाई की गई, तो एक अत्यंत सुंदर और अलौकिक शिवलिंग बरामद हुआ।

चूंकि वह व्यक्ति अत्यंत निर्धन (गरीब) था और उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर ही महादेव वहां प्रकट हुए थे, इसलिए इस धाम का नाम हमेशा के लिए 'बाबा गरीबनाथ' पड़ गया। बाद में मधेपुरा और दरभंगा के तत्कालीन राजाओं व स्थानीय जमींदारों के सहयोग से यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया।

मनोकामना लिंग के रूप में पूजे जाते हैं बाबा गरीबनाथ

धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बाबा गरीबनाथ को 'मनोकामना लिंग' माना जाता है।

मान्यता: सावन के महीने में जो भी भक्त सच्चे मन से बाबा का बेलपत्र, भांग, धतूरा और गंगाजल से श्रृंगार व अभिषेक करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। विशेष रूप से असाध्य रोगों से मुक्ति और संतान प्राप्ति के लिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु मन्नत मांगने आते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां आकर बाबा को सोने या चांदी का नेत्र और मुकुट भी अर्पित करते हैं।

जिला प्रशासन और न्यास समिति की पुख्ता तैयारियां

सावन के पहले ही दिन उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन और मंदिर न्यास समिति ने सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम किए हैं:

  • बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन: कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए शहर के कई रास्तों पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। पुरुष और महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारों (बैरिकेडिंग) की व्यवस्था की गई है।

  • सीसीटीवी से निगरानी: पूरे मेला क्षेत्र और मंदिर परिसर की निगरानी के लिए दर्जनों सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सादे लिबास में पुलिस बल की तैनाती की गई है।

  • स्वास्थ्य और पेयजल: कांवड़ पथ पर जगह-जगह नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, शुद्ध पेयजल और सेवा शिविर लगाए गए हैं ताकि लंबी दूरी तय करके आ रहे भक्तों को कोई परेशानी न हो।

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