एआई (AI) निगल गया 12,000 नौकरियां: ओरेकल ने की बड़े पैमाने पर छंटनी, खुद बताई ये हैरान करने वाली वजह
नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क): वैश्विक आईटी सेक्टर और नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। दुनिया की दिग्गज सॉफ्टवेयर और क्लाउड कंपनी ओरेकल (Oracle) ने पिछले 12 महीनों के भीतर अपने करीब 12,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल (Layoff) दिया है।
सबसे हैरान और डराने वाली बात यह है कि ओरेकल ने खुद आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि इस छंटनी के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़ा हाथ है। जिन विभागों से कर्मचारियों को निकाला गया है, वहां अब इंसानों की जगह एआई टूल्स (AI Tools) से काम लिया जा रहा है।
रेगुलेटरी फाइलिंग में ओरेकल ने किया बड़ा खुलासा
सोमवार को कंपनी द्वारा रेगुलेटरी अथॉरिटी को दी गई आधिकारिक जानकारी में साफ कहा गया है, "कंपनी के भीतर एआई टेक्नोलॉजी (AI Technology) को अपनाने और उसे लागू करने के परिणामस्वरूप नौकरियों में यह कटौती देखी गई है।"
31 मई 2026 तक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस छंटनी के बाद अब दुनियाभर में ओरेकल के कुल फुल-टाइम कर्मचारियों की संख्या घटकर 1,41,000 रह गई है, जो पहले 1,62,000 हुआ करती थी।
भारी वित्तीय दबाव से गुजर रही है कंपनी
मार्केट विश्लेषकों और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ओरेकल इस समय भारी वित्तीय दबाव (Financial Pressure) से गुजर रही है। दरअसल, कंपनी इस वक्त OpenAI जैसे अपने बड़े और हाई-प्रोफाइल ग्राहकों के लिए अत्याधुनिक 'एआई डेटा सेंटर्स' (AI Data Centers) के निर्माण में अरबों डॉलर का भारी-भरकम निवेश कर रही है। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे इस भारी खर्च की भरपाई करने और पैसा बचाने के लिए कंपनी ने कर्मचारियों पर छंटनी की कुल्हाड़ी चलाई है।
इस छंटनी का असर इतना बड़ा है कि अब ओरेकल में कर्मचारियों की संख्या साल 2022 में किए गए 'सर्नर' (Cerner) के ऐतिहासिक $28 Billion के अधिग्रहण के समय से भी कम हो गई है।
"आईटी और एमबीए का दौर खत्म"— पीएम मोदी के आर्थिक सलाहकार का बयान
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते कदम केवल ओरेकल ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के आईटी सेक्टर को प्रभावित कर रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकार ने एक इंटरव्यू में चेतावनी देते हुए कहा था कि "अब पारंपरिक आईटी (IT) और एमबीए (MBA) का स्वर्ण काल खत्म हो चुका है।"
वर्तमान में केवल विदेशी कंपनियां ही नहीं, बल्कि भारत की शीर्ष आईटी कंपनियां जैसे टीसीएस (TCS) और इंफोसिस (Infosys) भी वैश्विक स्तर पर कड़े संघर्ष के दौर से गुजर रही हैं। एआई के आने के बाद इन कंपनियों को नए प्रोजेक्ट्स और ऑर्डर्स मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार में उनके प्रदर्शन पर भी दिख रहा है।