टाटा के इस शेयर पर फिदा हुए बड़े-बड़े मार्केट एक्सपर्ट्स: ₹235 का दिया बंपर टारगेट प्राइस
भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और सुस्ती के माहौल के बीच टाटा ग्रुप (Tata Group) की दिग्गज और भरोसेमंद कंपनी टाटा स्टील (Tata Steel) को लेकर एक बेहद बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। अगर आप भी शेयर बाजार के निवेशक हैं और किसी मजबूत बुनियादी ढांचे (फंडामेंटल्स) वाले स्टॉक की तलाश में हैं, तो टाटा स्टील आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है। बाजार की नामी और प्रतिष्ठित डोमेस्टिक ब्रोकरेज फर्म 'एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग' (Antique Stock Broking) ने मेटल्स और माइनिंग सेक्टर पर जारी अपनी ताजा और विस्तृत रिसर्च रिपोर्ट में टाटा स्टील के शेयर को लेकर भारी तेजी (बुलिश) के संकेत दिए हैं। ब्रोकरेज ने इस मल्टीबैगर स्टॉक को अपनी टॉप पिक में शामिल करते हुए निवेशकों को मालामाल होने की बड़ी सलाह दी है।
मजबूत पकड़, कम कर्ज और रॉ मटेरियल इंटीग्रेशन वाले स्टील स्टॉक्स को ब्रोकरेज की पहली पसंद
ब्रोकरेज फर्म एंटीक ने मेटल सेक्टर का विश्लेषण करते हुए साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए वे शेयर बाजार में केवल उन्हीं स्टील उत्पादक कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनकी बाजार में हिस्सेदारी मजबूत है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, जिन कंपनियों का रॉ मटीरियल इंटीग्रेशन (कच्चे माल की उपलब्धता और प्रबंधन) सबसे बेहतर है और जिन पर कर्ज का बोझ लगातार कम हो रहा है, वे भविष्य में मल्टीबैगर रिटर्न देने का दम रखती हैं। इस पूरे पैमाने पर टाटा ग्रुप की टाटा स्टील पूरी तरह खरी उतरती है, यही वजह है कि तमाम लिस्टेड स्टील कंपनियों के मुकाबले इस समय टाटा स्टील के शेयरों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।
कलिंगनगर ब्लास्ट फर्नेस की बढ़ रही है क्षमता, खर्चों में कटौती से कंपनी का एबिटडा (EBITDA) चमकेगा
विशेषज्ञों ने टाटा स्टील के पक्ष में मजबूत तर्क देते हुए बताया कि कंपनी के कुल प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में अकेले 75 फीसदी हिस्सेदारी 'फ्लैट प्रोडक्ट्स' की है, जिनकी बाजार में डिमांड सबसे ज्यादा रहती है। इसके अलावा कंपनी ओडिशा स्थित अपने 5 एमटीपीए (MTPA) कलिंगनगर ब्लास्ट फर्नेस और 2.2 एमटीपीए कोल्ड रोलिंग मिल कॉम्प्लेक्स की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही है। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा स्टील ने अपनी परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) को कम करने के लिए हाल के दिनों में कई बड़े और रणनीतिक कदम उठाए हैं। कंपनी की इस कॉस्ट-कटिंग पॉलिसी से आने वाली तिमाहियों में उसके एबिटडा (EBITDA) यानी परिचालन मुनाफे में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, हालांकि कोकिंग कोल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंची कीमतों से इस मुनाफे पर थोड़ा-बहुत असर जरूर देखने को मिल सकता है।
जानिए मौजूदा शेयर का भाव और ब्रोकरेज का नया टारगेट प्राइस, 52 हफ्ते के हाई के बेहद करीब है स्टॉक
अगर टाटा स्टील के शेयर प्राइस की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें, तो यह शेयर फिलहाल बाजार में 198 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। लेकिन ब्रोकरेज फर्म एंटीक ने इसके शानदार भविष्य और मजबूत ग्रोथ को देखते हुए टाटा स्टील के शेयर के लिए ₹235 का एक बड़ा और नया टारगेट प्राइस सेट कर दिया है। आपको बता दें कि इसी साल 15 मई को इस शेयर ने रफ्तार पकड़ते हुए 224.40 रुपये के स्तर को छुआ था, जो कि इस शेयर के पिछले 52 हफ्तों का सबसे उच्चतम स्तर (52-Week High) है। वहीं, अगर इसके सबसे निचले स्तर की बात करें तो इसका 52 हफ्तों का लो प्राइस 149.70 रुपये रहा है, यानी निचले स्तरों से यह शेयर पहले ही निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे चुका है और अब ₹235 के नए लक्ष्य की तरफ बढ़ने को पूरी तरह तैयार है।
ब्रिटेन के पोर्ट टैलबोट प्रोजेक्ट में लग सकता है 6 से 8 महीने का झटका, बिजली कनेक्शन में देरी बनी मुख्य वजह
इस बंपर टारगेट के बीच कंपनी के वैश्विक कारोबार से जुड़ी एक और बड़ी व्यावहारिक खबर सामने आई है। टाटा स्टील को ब्रिटेन (UK) में शुरू होने वाली अपनी 1.25 अरब पाउंड की भारी-भरकम और महत्वाकांक्षी कम कार्बन उत्सर्जन (लो-कार्बन एमिशन) वाली स्टील परियोजना की समयसीमा में कुछ तकनीकी कारणों से छह से आठ महीने की देरी का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी को ब्रिटेन के पोर्ट टैलबोट संयंत्र में 32 लाख टन क्षमता वाला अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) स्थापित करना है, जो वहां के पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले ब्लास्ट फर्नेस की जगह लेगा। यह मेगा प्रोजेक्ट कंपनी की वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की ग्रीन स्ट्रेटजी का सबसे प्रमुख हिस्सा है, लेकिन वहां की स्थानीय एजेंसियों से आवश्यक भारी बिजली कनेक्शन मिलने में हो रही देरी के कारण इसकी समयसीमा आगे खिसकना तय माना जा रहा है।
सीएफओ कौशिक चटर्जी ने संभाली कमान, यूके सरकार और नेशनल ग्रिड के साथ बातचीत जारी
टाटा स्टील के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) कौशिक चटर्जी ने इस ब्रिटिश प्रोजेक्ट में हो रही देरी पर आधिकारिक और पारदर्शी जानकारी साझा करते हुए बताया कि कंपनी प्रबंधन इस समस्या को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील की टीम इस समय ब्रिटेन सरकार, वहां के राष्ट्रीय ग्रिड और इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम ऑपरेटर (ESO) के आला अधिकारियों के साथ लगातार उच्च स्तरीय बैठकें कर रही है, ताकि बिजली कनेक्शन की इस देरी के प्रभाव को कम से कम किया जा सके। हालांकि, सीएफओ चटर्जी ने भी बेहद ईमानदारी से यह स्वीकार किया कि तमाम कोशिशों के बावजूद मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए प्रोजेक्ट के पूरा होने में छह से आठ महीने की देरी होना अब लगभग तय है। लेकिन बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि इस वैश्विक देरी का असर कंपनी के घरेलू भारतीय कारोबार के मजबूत प्रदर्शन और शेयर के ₹235 के लक्ष्य पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा।