लाल सागर पर मंडराया संकट! ईरान की नई धमकी से कच्चे तेल में मची तबाही, आज फिर उछले दाम; जानें भारत पर क्या होगा असर
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और तेल बाजारों के लिए यह हफ्ता बेहद तनावपूर्ण साबित हो रहा है। पहले से ही जारी अमेरिका-ईरान सैन्य संघर्ष के बीच अब एक नया और बेहद गंभीर खतरा पैदा हो गया है। ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों के जरिए लाल सागर (Red Sea) के शिपिंग रूट को पूरी तरह से ठप करने की ईरान की नई धमकी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खलबली मचा दी है। इस ताजा भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) के चलते आज कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखा जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाद अब लाल सागर पर मंडराते इस खतरे ने तेल आयात करने वाले भारत जैसे बड़े देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
आज कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दाम (Crude Oil Prices Today)
लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका द्वारा ईरान के तटीय ठिकानों पर की गई लगातार एयरस्ट्राइक्स और जवाबी हमलों के कारण दोनों ही बेंचमार्क कच्चे तेलों में आज तेजी का रुख बना हुआ है।
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ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): वैश्विक मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड आज 0.81 फीसदी की तेजी के साथ $84.91 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड में लगभग 12% की भारी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की जा चुकी है।
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WTI क्रूड (WTI Crude): अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी आज 0.87 फीसदी चढ़कर $79.68 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे यह लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त के रास्ते पर है।
होर्मुज के बाद अब 'रेड सी' बंद करने की नई धमकी
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान ने यमन के हुती सैन्य संगठन को लाल सागर के महत्वपूर्ण निर्यात मार्गों को भी बंद करने की तैयारी करने का निर्देश दिया है।
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डबल चोक पॉइंट का संकट: अब तक दुनिया का लगभग 20 से 25 प्रतिशत समुद्री तेल केवल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था, जो पहले से ही आंशिक रूप से प्रभावित है।
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सप्लाई चेन पर बड़ा प्रहार: यदि लाल सागर का मार्ग भी पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है, तो एशिया और यूरोप के बीच होने वाले वैश्विक व्यापार को इतिहास के सबसे बड़े 'सप्लाई शॉक' का सामना करना पड़ेगा।
अमेरिका की ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक्स से भड़की आग
इस सप्ताह अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के तटीय निगरानी केंद्रों, रडार साइटों और सैन्य बुनियादी ढांचों पर लगातार छठे दिन भी भारी हवाई हमले किए हैं। इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। कतर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आज तड़के ही उन्होंने एक ईरानी मिसाइल हमले को हवा में ही नाकाम किया है। इस लगातार बढ़ते सैन्य तनाव ने तेल बाजार में अनिश्चितता को चरम पर पहुंचा दिया है।
भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। मिडिल ईस्ट और रेड सी रूट भारत की ऊर्जा सुरक्षा की जीवन रेखा हैं।
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महंगाई का नया खतरा: यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे माल ढुलाई महंगी होने का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
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सप्लाई रूट में देरी: लाल सागर में तनाव के चलते भारतीय जहाजों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ सकता है, जिससे शिपिंग का खर्च और समय दोनों ही काफी बढ़ जाएंगे।