Crude Oil Prices: ईरान युद्ध पर ट्रंप के बैकफुट पर आते ही कच्चा तेल धड़ाम, OPEC+ ने भी दी खुशखबरी, क्या अब घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य हमले को टालने और कूटनीतिक बातचीत शुरू करने के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड के दाम करीब 5 से 6 फीसदी तक गिर गए हैं। इसके साथ ही तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक प्लस (OPEC+) ने भी उत्पादन बढ़ाने का ऐलान कर दुनिया भर के बाजारों को बड़ी राहत दी है। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेज गिरावट के बाद भारत में भी लंबे समय से स्थिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की उम्मीदें एक बार फिर परवान चढ़ने लगी हैं।
ट्रंप के शांति प्रस्ताव से क्रैश हुआ कच्चा तेल, जानिए आज का ताजा भाव
ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से चल रहे युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर था, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं। लेकिन सोमवार (3 अगस्त 2026) को राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े हमले को रोकते हुए बातचीत की पेशकश की। इस खबर के आते ही ब्रेंट क्रूड करीब 5.39% टूटकर 83.19 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 6% से अधिक गिरकर 79.55 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली यह बातचीत अगर सफल रहती है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल की आवाजाही सामान्य होती है, तो क्रूड ऑयल की कीमतों में और अधिक गिरावट देखने को मिल सकती है।
OPEC+ की नई नीति से भी मिली राहत, सितंबर से बढ़ेगा उत्पादन
कच्चे तेल की कीमतों को नीचे लाने में ओपेक प्लस देशों का भी बड़ा हाथ रहा है। रविवार को ओपेक प्लस (OPEC+) समूह ने अपनी अहम बैठक में सितंबर से तेल उत्पादन के कोटे में 1,88,000 बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी करने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के देश महंगी ऊर्जा कीमतों और महंगाई से जूझ रहे हैं। सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के इस कदम से वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ेगी। इससे पहले भू-राजनीतिक तनाव और लाल सागर (Red Sea) में जहाजों पर हो रहे हमलों के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी, लेकिन अब उत्पादन बढ़ने से कीमतों पर काफी दबाव कम होगा।
क्या भारत में भी सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? जानिए ग्राहकों के लिए क्या है उम्मीद
भारत अपनी जरूरत का करीब 80 से 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का 80 से 85 डॉलर के बीच आना भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए काफी फायदेमंद है। हालांकि, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरी बड़ी कटौती काफी समय पहले हुई थी। अब जब कच्चे तेल की कीमतों में फिर से भारी नरमी आई है और ओपेक प्लस ने भी सप्लाई बढ़ाने का ठोस फैसला किया है, तो इस बात की प्रबल संभावना है कि आगामी त्योहारी सीजन से पहले सरकार आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती का तोहफा दे सकती है।