Crude Oil Rollercoaster: कभी धड़ाम तो कभी तूफानी तेजी, आखिर क्यों लुढ़क रहा और फिर चढ़ रहा है कच्चा तेल?
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की चाल इन दिनों किसी रोलरकोस्टर राइड जैसी हो गई है। कभी बाजार में भारी गिरावट (Crashing) देखने को मिलती है तो अगले ही पल कीमतों में अचानक तूफान आ जाता है। एनर्जी मार्केट में मचे इस गजब के खेल ने दुनियाभर के निवेशकों और अर्थशास्त्रियों को उलझन में डाल दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक आंकड़ों के बीच कच्चे तेल के भाव में इस तरह के बार-बार बड़े उतार-चढ़ाव क्यों आ रहे हैं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्यों मची है उथल-पुथल?
कच्चे तेल की कीमतों में इस अस्थिरता के पीछे सबसे बड़ा कारण भू-राजनीतिक समीकरण और कूटनीतिक बयानबाजी हैं। अमेरिका और पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों, विशेषकर ईरान के बीच चल रहे तनाव और वार्ताओं के संकेतों का सीधा असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ रहा है। कभी सैन्य टकराव की आशंका से कीमतें आसमान छूने लगती हैं, तो कभी किसी समझौते या नरमी के संकेतों से बाजार धड़ाम से नीचे गिर जाता है। इसके अलावा, ओपेक प्लस (OPEC+) देशों के उत्पादन बढ़ाने या घटाने के फैसलों ने भी आग में घी का काम किया है।
मांग और आपूर्ति का अजीब गणित
ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य नहीं हो पा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर जैसे संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्गों पर जहाजों की आवाजाही में रुकावट और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण सप्लायर्स सतर्क हैं। दूसरी ओर, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं जैसे चीन और अन्य एशियाई बाजारों में मांग (Demand) के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसके चलते जब भी मांग कमजोर पड़ती है, दाम लुढ़क जाते हैं और सप्लाई की हल्की सी भी अड़चन पर कीमतें दोबारा तूफानी तेजी पकड़ लेती हैं।
घरेलू बाजार और महंगाई पर इसका असर
कच्चे तेल के भाव में हो रहे इस लुकाछिपी के खेल का सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ता है। यद्यपि वैश्विक स्तर पर कीमतों के टूटने से घरेलू स्तर पर राहत की उम्मीद जगती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अचानक वापसी से ईंधन के दामों और खुदरा महंगाई पर दबाव बरकरार रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ओपेक के उत्पादन फैसले और मध्य पूर्व के हालात पूरी तरह स्थिर नहीं होते, तब तक क्रूड ऑयल का यह उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।