डेड इकोनॉमी से 'सुपरपावर' तक: भारत की विकास दर पर यू-टर्न लेकर दुनिया के दिग्गज ने माना लोहा

डेड इकोनॉमी से 'सुपरपावर' तक: भारत की विकास दर पर यू-टर्न लेकर दुनिया के दिग्गज ने माना लोहा

कभी भारत की अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' (Dead Economy) की संज्ञा देने वाले वैश्विक जानकारों और अर्थशास्त्रियों ने अब अपने सुर बदल लिए हैं। हाल ही में आए आंकड़ों और विकास की रफ्तार को देखकर वैश्विक पटल पर बैठे बड़े दिग्गजों ने अपना यू-टर्न लेते हुए यह स्वीकार किया है कि भारत न केवल मजबूती से आगे बढ़ रहा है, बल्कि 7 से 8% की विकास दर के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला देश बना हुआ है।

क्या था 'डेड इकोनॉमी' का दावा और क्यों पड़ा पलटना?

एक समय था जब कुछ विश्लेषकों ने वैश्विक मंदी और अन्य घरेलू कारकों का हवाला देते हुए भारतीय बाजार को 'डेड' करार दिया था। उनका तर्क था कि भारत की विकास दर ठहर गई है। लेकिन पिछले कुछ तिमाहियों के जीडीपी (GDP) आंकड़े, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए क्रांतिकारी बदलावों ने उन सभी दावों को गलत साबित कर दिया है। आज भारत की अर्थव्यवस्था न केवल स्थिर है, बल्कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच 'ब्राइट स्पॉट' (उज्ज्वल केंद्र) बनी हुई है।

7 से 8% की ग्रोथ का असली इंजन

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह 7 से 8% की ग्रोथ दर कोई तुक्का नहीं है, बल्कि यह सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधारों (Structural Reforms) का परिणाम है। इसमें प्रमुख हैं:

  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: यूपीआई और फिनटेक के माध्यम से आर्थिक लेन-देन में आई तेजी।

  • मैन्युफैक्चरिंग पुश: 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा।

  • निवेश और मांग: घरेलू स्तर पर बढ़ती खपत और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में लगातार इजाफा।

अब क्या कह रहे हैं वैश्विक दिग्गज?

इन दिग्गजों का अब यह मानना है कि भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, वह न केवल अपनी आंतरिक जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में भी एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरा है। उनका यू-टर्न यह संकेत देता है कि भारत अब केवल एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक इंजन को गति देने वाला एक अनिवार्य स्तंभ बन गया है।

निष्कर्ष: क्या भारत बनेगा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था?

जिस रफ्तार से भारत अपनी नीतियों को क्रियान्वित कर रहा है, उसे देखते हुए यह स्पष्ट है कि 'डेड इकोनॉमी' का टैग इतिहास के पन्नों में दब चुका है। अर्थशास्त्रियों का अब स्पष्ट मत है कि भारत अपनी इसी विकास दर को बनाए रखता है, तो वह जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल कर लेगा।