सोने-चांदी में शानदार तेजी, एक साल में चांदी ने सोने को पछाड़ा; दिया 45% रिटर्न

सोने-चांदी में शानदार तेजी, एक साल में चांदी ने सोने को पछाड़ा; दिया 45% रिटर्न

भारतीय और वैश्विक सर्राफा बाजार में इन दिनों कीमती धातुओं की चमक ने निवेशकों को झूमने पर मजबूर कर दिया है, जहां सोने के साथ-साथ चांदी ने भी अपनी ऐतिहासिक छलांग से सबको हैरान कर दिया है। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो सफेद धातु यानी चांदी ने निवेश पर रिटर्न के मामले में पीले धातु यानी सोने को काफी पीछे छोड़ दिया है। निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले एक साल की अवधि में चांदी ने लगभग 45 प्रतिशत का बंपर रिटर्न देकर अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। औद्योगिक मांग में अचानक आई भारी तेजी, वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में रुकावट और कमोडिटी मार्केट में सुरक्षित निवेश (Safe Haven Investment) के बढ़ते रुझान के कारण सोने और चांदी दोनों की कीमतों में लगातार नए रिकॉर्ड बनते जा रहे हैं, जिससे सर्राफा बाजार में जबरदस्त उत्साह का माहौल बना हुआ है।

चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल, औद्योगिक मांग और ग्रीन एनर्जी ने बदला खेल

वैश्विक वित्तीय बाजारों में चांदी केवल एक आभूषण या निवेश का साधन ही नहीं रह गई है, बल्कि आधुनिक उद्योगों, सोलर पैनल निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और सेमीकंडक्टर चिप्स में इसकी मांग आसमान छू रही है। पिछले एक साल में दुनिया भर की सरकारों द्वारा रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर फोकस बढ़ाने के कारण चांदी की खपत में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जबकि इसके मुकाबले खानों से चांदी का उत्पादन उस अनुपात में नहीं बढ़ पाया है। मांग और आपूर्ति के बीच पैदा हुए इसी भारी अंतर के कारण चांदी की कीमतों में लगातार तूफानी तेजी देखने को मिली है। निवेशकों ने सोने की तुलना में चांदी में पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद समझा, क्योंकि कम समय में चांदी ने निवेश के पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए लगभग 45% तक का शानदार रिटर्न अपने निवेशकों की झोली में डाल दिया है।

सोने की चमक भी कम नहीं, सुरक्षित निवेश के रूप में निवेशकों की पहली पसंद बना पीला धातु

भले ही प्रतिशत रिटर्न के मामले में चांदी ने सोने को पछाड़ दिया हो, लेकिन सुरक्षित निवेश और पोर्टफोलियो को स्थिरता देने के मामले में सोने का जलवा आज भी कायम है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी मात्रा में सोने की खरीदारी (Central Bank Gold Reserves) किए जाने और भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical Tensions) के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें लगातार नए शिखरों को छू रही हैं। युद्ध के माहौल, महंगाई के बढ़ते दबाव और शेयर बाजार में अनिश्चितता के दौर में निवेशकों का भरोसा हमेशा सोने पर सबसे पहले टिकता है। भारतीय सर्राफा बाजारों में भी त्योहारी और शादी के सीजन के दौरान सोने की मांग में कोई कमी नहीं आई है, और इसके दाम भी लगातार निवेशकों को मजबूत और स्थिर रिटर्न प्रदान कर रहे हैं।

विशेषज्ञ की सलाह: अपने पोर्टफोलियो में कैसे बनाएं सोने और चांदी का बेहतरीन संतुलन?

कीमती धातुओं में आ रही इस ऐतिहासिक तेजी को देखते हुए वित्तीय और बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि उन्हें अपनी कुल निवेश राशि का एक निश्चित हिस्सा (लगभग 10 से 15 प्रतिशत) सोने और चांदी में डायवर्सिफाई करके रखना चाहिए। चूंकि सोना अनिश्चित समय में एक मजबूत ढाल का काम करता है, वहीं चांदी औद्योगिक मांग के कारण तेज रिटर्न देने की क्षमता रखती है, इसलिए दोनों धातुओं का सही संतुलन निवेशकों के पोर्टफोलियो को सबसे सुरक्षित बनाता है। म्यूचुअल फंड, गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) और डिजिटल सिल्वर के माध्यम से भी आज के युवा निवेशक बिना भौतिक रूप से खरीदे इन धातुओं में आसानी से निवेश कर रहे हैं, जिससे बाजार में तरलता और पारदर्शिता दोनों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है कीमतें, सर्राफा बाजार में निवेशकों की भारी भीड़

आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक नीतियों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसलों और डॉलर इंडेक्स की चाल का असर सोने और चांदी के दामों पर साफ तौर पर दिखाई देगा। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता बनी रहेगी, तब तक कीमती धातुओं में मंदी आने की कोई संभावना नहीं है। सर्राफा बाजारों में दुकानदारों और बड़े निवेशकों का मानना है कि आने वाले त्योहारी सीजनों में कीमतों के नए रिकॉर्ड टूट सकते हैं। 45% का यह शानदार रिटर्न इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि कठिन आर्थिक दौर में सोना और चांदी ही निवेशकों के सबसे बड़े और भरोसेमंद मददगार साबित हुए हैं, और आगे भी यह तेजी बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखेगी।