सचिन की वजह से ही खेल पाया 179 रन की पारी, शतक ठोकने के बाद साउथ अफ्रीकी कप्तान टेम्बा बावुमा का बड़ा खुलासा

सचिन की वजह से ही खेल पाया 179 रन की पारी, शतक ठोकने के बाद साउथ अफ्रीकी कप्तान टेम्बा बावुमा का बड़ा खुलासा

सेंट जॉर्ज पार्क में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में साउथ अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 179 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर न केवल अपनी टीम को गहरे संकट से बाहर निकाला, बल्कि अपनी बल्लेबाजी तकनीक को लेकर एक दिलचस्प और बड़ा खुलासा भी किया है। एक समय मेजबान प्रोटियाज टीम महज 110 रन पर अपने 6 शीर्ष विकेट गंवाकर बैकफुट पर आ चुकी थी। ऐसे नाजुक मोड़ पर बावुमा ने क्रीज पर खूंटा गाड़ दिया और मार्को जेनसन व साइमन हार्मर के साथ मिलकर पलटवार करते हुए साउथ अफ्रीका का स्कोर 425 रनों तक पहुंचा दिया। इस मैराथन पारी के दम पर अफ्रीकी टीम ने पहली पारी में मजबूत बढ़त हासिल की।

करियर का सर्वोच्च टेस्ट स्कोर खड़ा करने के लिए 334 गेंदों का डटकर सामना करने वाले 36 वर्षीय बावुमा ने दिन का खेल खत्म होने के बाद अपनी बल्लेबाजी का श्रेय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को दिया। बावुमा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी छोटी कद-काठी के कारण क्रीज पर सचिन तेंदुलकर के फुटवर्क और सटीक मूवमेंट से गहरी प्रेरणा ली है। उन्होंने कहा कि वह मैदान पर किसी लंबे कद के खिलाड़ी की तरह भारी-भरकम कदम नहीं निकाल सकते, इसलिए सचिन की बल्लेबाजी शैली का अध्ययन कर उन्होंने शरीर के करीब गेंद को खेलने और मूवमेंट में अत्यधिक कुशल बनने की कला सीखी। हालांकि कभी-कभार इससे जोखिम भी रहता है, लेकिन उनके स्वाभाविक खेल के लिए यही तकनीक सबसे ज्यादा मुफीद साबित हुई है।

यह शानदार शतक बावुमा के पिछले सर्वश्रेष्ठ स्कोर 172 रन (जो उन्होंने 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ बनाया था) से भी आगे निकल गया है। वनडे सीरीज और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट में लगातार संघर्ष कर रहे दक्षिण अफ्रीकी कप्तान के लिए यह वापसी बेहद खास और राहत भरी रही। बावुमा ने स्वीकार किया कि चोट और लंबे अंतराल के चलते वह अपनी पुरानी लय (रिदम) हासिल नहीं कर पा रहे थे, लेकिन नेट्स में बिताए गए कड़े पसीने और आत्मविश्वास ने उन्हें खोया हुआ फॉर्म वापस दिलाया। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण की ताकत की तारीफ करते हुए कप्तान ने माना कि बड़े मैचों में जिम्मेदारी निभाना ही एक लीडर की असली पहचान होती है।