अगर पेट्रोल में इथेनॉल न होता तो ₹125 बिकता लीटर! सरकार ने संसद में समझाया पूरा गणित

अगर पेट्रोल में इथेनॉल न होता तो ₹125 बिकता लीटर! सरकार ने संसद में समझाया पूरा गणित

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच आम जनता के लिए पेट्रोल की कीमतों को लेकर सरकार ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। संसद में सरकार द्वारा दिए गए एक बयान के मुताबिक, अगर देश में पेट्रोल के साथ इथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) का प्रोग्राम काम नहीं कर रहा होता, तो भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल के लिए बहुत ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ती। सरकार ने बताया कि किस तरह इथेनॉल ने अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले भारी बोझ को रोकने में एक ढाल का काम किया है।

इथेनॉल न होने पर ₹125 पार हो जाती कीमत

लोकसभा में सरकार की तरफ से दी गई लिखित जानकारी के अनुसार, हाल ही में हुए पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 70 से 80 फीसदी तक उछल गई थीं। अगर भारत पूरी तरह से सिर्फ आयातित कच्चे तेल पर निर्भर होता, तो देश के बाजार में पेट्रोल की कीमत आसानी से ₹125 प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर जाती। लेकिन देश में डोमेस्टिक लेवल पर तैयार होने वाले इथेनॉल की उपलब्धता के चलते ऐसा नहीं हुआ और दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹94.77 प्रति लीटर पर स्थिर बनी रही।

तेल कंपनियों ने उठाया नुकसान, जनता को मिली राहत

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री ने संसद को बताया कि जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब भी भारत में पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को करीब ₹70 प्रति लीटर की दर से इथेनॉल मिल रहा था। इस वजह से घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में केवल 7 से 8 प्रतिशत की ही मामूली बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, इस दौरान तेल कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर औसतन ₹11 का नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ा, जो कुल मिलाकर लगभग ₹21,300 करोड़ बैठता है, लेकिन उपभोक्ताओं को महंगाई के झटके से बचा लिया गया।

सुल्तानपुर और यूपी के गन्ना किसानों को सीधा फायदा

इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का एक बड़ा भौगोलिक और आर्थिक लाभ उत्तर प्रदेश, विशेषकर सुल्तानपुर, लखीमपुर और पश्चिमी यूपी जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को मिल रहा है। चूंकि इथेनॉल का मुख्य हिस्सा गन्ने के रस, बी-हैवी शीरा (B-heavy molasses) और मक्के जैसी कृषि फसलों से तैयार किया जाता है, इसलिए स्थानीय किसानों के लिए आय का एक नया और मजबूत जरिया खुल गया है। स्थानीय कर और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधरी है, जिससे किसानों को उनके गन्ने का भुगतान समय पर और बेहतर दरों पर मिल पा रहा है।

विदेशी मुद्रा की भारी बचत और इंजन सुरक्षा पर बड़ा अपडेट

सरकार ने यह भी साफ किया कि इस इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम से देश को करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) बचाने में मदद मिली है। वहीं, E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) वाले ईंधन से गाड़ियों के इंजन खराब होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश में 23 करोड़ से अधिक वाहन बिना किसी खराबी के इस फ्यूल पर चल रहे हैं。

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