आम जनता की जेब पर असर: भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता आज से लागू, जानिए क्या होगा सस्ता और किसे मिलेगा बंपर रोजगार

आम जनता की जेब पर असर: भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता आज से लागू, जानिए क्या होगा सस्ता और किसे मिलेगा बंपर रोजगार

वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंच पर आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता यानी सीईटीए आधिकारिक तौर पर जमीन पर उतर चुका है। इस समझौते का सबसे बड़ा सीधा असर दोनों देशों की आम जनता, घरेलू बाजार और कारोबारियों पर पड़ने वाला है। 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ शुरू हुई यह डील मौजूदा 55-60 अरब डॉलर के व्यापार को एक नई ऊंचाई देगी। आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि विदेशी ब्रांड्स अब बजट में आ सकेंगे, जबकि घरेलू कामगारों के लिए ब्रिटेन का बाजार पूरी तरह खुल जाएगा।

प्रीमियम विदेशी शौक होंगे सस्ते, मध्यम वर्ग को मिलेगी राहत

अगर आप भी विदेशी कारों या प्रीमियम ब्रांड्स के शौकीन हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। इस समझौते के लागू होने के बाद ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की, चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स पर लगने वाली भारी ड्यूटी में बड़ी कटौती का रास्ता साफ हो गया है।

अब तक भारत में स्कॉच व्हिस्की पर 150 फीसदी का भारी-भरकम टैक्स लगता था, जिसे तत्काल घटाकर 75 फीसदी किया जा रहा है। आने वाले दस सालों में यह घटकर महज 40 फीसदी रह जाएगा। यही नहीं, शानदार ब्रिटिश कारों पर लगने वाला 110 प्रतिशत का टैक्स भी कोटा सिस्टम के तहत गिरकर सिर्फ 10 प्रतिशत पर आ जाएगा। इसका सीधा फायदा इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों की खरीदारी में भी दिखेगा।

भारतीय कामगारों और छोटे उद्यमियों के लिए खुला बड़ा बाजार

इस पूरी डील का सबसे शानदार पहलू यह है कि भारत अपने लगभग 99 फीसदी सामान को बिना किसी टैक्स के ब्रिटेन भेज सकेगा। इसका मतलब है कि हमारे देश के छोटे कारीगरों, बुनकरों और लघु उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तगड़ा मुनाफा कमाने का मौका मिलेगा।

लंदन के बाजारों में अब भारत के कपड़े, चमड़े के जूते, रत्न, आभूषण और घरेलू प्लास्टिक उत्पादों पर कोई इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। इससे भारतीय उत्पादों की कीमत विदेशी बाजार में कम होगी और उनकी मांग तेजी से बढ़ेगी। इस कदम से देश के टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स सेक्टर्स में लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

किसानों के हितों की रक्षा के लिए मजबूत चक्रव्यूह

आमतौर पर जब दो बड़े देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता होता है तो स्थानीय किसानों को नुकसान का डर रहता है। लेकिन इस डील में भारत सरकार ने देश के अन्नदाताओं और डेयरी उद्योग के हितों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं।

विदेशी सप्लायर्स की तरफ से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स, चीनी, चावल, सेब, पनीर, चिकन और अंडों जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि देश के ग्रामीण अर्थतंत्र पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

आने वाले दिनों में क्या होगा सस्ता और किसे मिलेगा फायदा

इस व्यापारिक दोस्ती के बाद भारतीय बाजार में मशीनरी, इंडस्ट्रियल टूल्स, मेडिकल इक्विपमेंट, चॉकलेट, बिस्कुट, कॉस्मेटिक्स और प्रीमियम गाड़ियां काफी किफायती दामों पर मिलने लगेंगी। दूसरी तरफ भारत के सी-फूड, रेडीमेड गारमेंट्स, लेदर गुड्स, केमिकल और जेम्स एंड ज्वेलरी बिजनेस को बंपर फायदा होगा। जानकारों का मानना है कि साल 2040 तक दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार में करीब 39 फीसदी का तगड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

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