भारत में बुनियादी ढांचे को मिलेगा पंख, ₹18.66 लाख करोड़ के 396 मेगा प्रोजेक्ट्स पर सरकार की पैनी नजर
भारत के आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के कायाकल्प की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बार फिर ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपनी रफ्तार को कई गुना बढ़ा दिया है। देश के मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और इंटीग्रेटेड प्लानिंग के सबसे ताकतवर इंजन बन चुके 'पीएम गतिशक्ति' नेशनल मास्टर प्लान के तहत अब देश के विभिन्न राज्यों में फैले लगभग 396 बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को युद्धस्तर पर पूरा करने की मुहर लग गई है। इन मेगा प्रोजेक्ट्स की कुल अनुमानित लागत चौंकाने वाली है, जो कि करीब 18.66 लाख करोड़ रुपये है। सरकार की इस उच्चस्तरीय और दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य देश के लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को कम करना, माल ढुलाई की समयसीमा को चुस्त-दुरस्त बनाना और देश के कोने-कोने तक निर्बाध औद्योगिक व परिवहन कनेक्टिविटी स्थापित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप शुरू किया गया यह महत्वाकांक्षी प्लेटफॉर्म अब भारतीय अर्थव्यवस्था को सुपर-स्पीड देने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिससे रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी अभूतपूर्व गति मिलेगी।
पीएम गतिशक्ति विजन से बदल रही देश की इन्फ्रास्ट्रक्चर तस्वीर
जब से देश में 'पीएम गतिशक्ति' नेशनल मास्टर प्लान की नींव रखी गई है, तब से सरकारी विभागों के बीच काम करने के पारंपरिक और सुस्त तौर-तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां अलग-अलग मंत्रालय अपनी योजनाओं को बिना किसी आपसी समन्वय के आगे बढ़ाते थे, जिससे सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और ऊर्जा गलियारों के निर्माण में भारी विलंब और बजट में बेवजह बढ़ोतरी होती थी, वहीं अब इस डिजिटल मैपिंग प्लेटफॉर्म के जरिए सभी बाधाएं दूर हो चुकी हैं। आज रेलवे, सड़क परिवहन, नागरिक उड्डयन, शिपिंग और टेलीकॉम जैसे तमाम प्रमुख विभाग एक ही साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रियल-टाइम डेटा के साथ काम कर रहे हैं। सरकार द्वारा हाल ही में समीक्षा किए गए 396 प्रोजेक्ट्स इसी इंटीग्रेटेड सिस्टम की देन हैं, जहां हर एक परियोजना की जियो-स्पेशियल मैपिंग के जरिए पल-पल की निगरानी की जा रही है। इससे न केवल प्रोजेक्ट्स की लागत नियंत्रण में रहती है, बल्कि समय पर उनके पूरा होने की गारंटी भी सुनिश्चित होती है।
₹18.66 लाख करोड़ के इन 396 मेगा प्रोजेक्ट्स में क्या है खास
सरकार की पैनी नजर से गुजरने वाले इन 396 प्रोजेक्ट्स का दायरा बेहद व्यापक और दूरगामी प्रभावों वाला है। इसमें देश के महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के कार्य और आधुनिक रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास जैसी योजनाएं प्रमुखता से शामिल हैं। इन परियोजनाओं पर खर्च होने वाले 18.66 लाख करोड़ रुपये देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सीधे तौर पर बूस्ट करने का काम करेंगे। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को जमीन पर उतारने के लिए यह जरूरी था कि लॉजिस्टिक्स का बुनियादी ढांचा दुनिया के सबसे बेहतरीन देशों के समकक्ष खड़ा हो सके। इन परियोजनाओं के पूरा होने से भारत में सामानों की आवाजाही न सिर्फ तेज होगी, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भारतीय उत्पाद कम लागत के साथ अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक माल ढुलाई के वैकल्पिक और सुगम मार्ग तैयार होने से देश के हर हिस्से में विकास की बयार बहेगी।
लॉजिस्टिक्स कॉस्ट घटने से वैश्विक बाजार में मजबूत होगी भारत की स्थिति
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ उसकी लॉजिस्टिक्स दक्षता पर टिकी होती है। भारत में लंबे समय से उच्च लॉजिस्टिक्स लागत एक बड़ी चुनौती रही है, जिसके कारण भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में कई बार कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता था। पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान इसी मुख्य दर्द को दूर करने के लिए ब्रह्मास्त्र साबित हो रहा है। इन 396 मेगा प्रोजेक्ट्स के धरातल पर उतरने से सप्लाई चेन की तमाम अड़चनें दूर हो जाएंगी। जब सड़के चौड़ी होंगी, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाड़ियां फर्राटा भरेंगी और बंदरगाहों पर टर्नअराउंड टाइम घटेगा, तो स्वतः ही ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम हो जाएगा। कम लागत का सीधा फायदा देश के मैन्युफैक्चरर्स, किसानों और छोटे-बड़े व्यापारियों को मिलेगा। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों के लिए भी भारत एक बेहद आकर्षक और भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है, क्योंकि उन्हें अब भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और रूट प्लानिंग जैसी जटिलताओं से निपटने के लिए एक सिंगल-विंडो और पारदर्शी व्यवस्था मिल रही है।
उत्तर प्रदेश समेत देश के हर कोने में विकास और रोजगार की बहार
पीएम गतिशक्ति के इन विशाल प्रोजेक्ट्स का असर देश के हर राज्य और क्षेत्रीय भूगोल पर बहुत गहराई से पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में भी इस योजना के तहत कई एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण के कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इन परियोजनाओं के चलने से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। सीमेंट, स्टील, ऊर्जा और भारी मशीनरी जैसे उद्योगों में मांग अचानक से बढ़ गई है, जिससे औद्योगिक उत्पादन में भी भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है। सरकार की पैनी नजर और मंत्रियों तथा शीर्ष अधिकारियों द्वारा हर महीने की जाने वाली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि किसी भी स्तर पर लालफीताशाही या सुस्ती के लिए कोई जगह न बचे। कुल मिलाकर, पीएम गतिशक्ति के जरिए ₹18.66 लाख करोड़ का यह महा-निवेश आने वाले समय में भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सुपरपावर बनाने की दिशा में सबसे मजबूत मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।