भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में आया भूचाल, एक ही सप्ताह में 45 अरब डॉलर की ऐतिहासिक छलांग
भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर इस समय एक ऐसी अभूतपूर्व और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है, जिसने देश के वित्तीय विश्लेषकों, नीति निर्माताओं और वैश्विक निवेशकों को भी चकित करके रख दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves of India) में एक ही सप्ताह के भीतर जो भारी-भरकम उछाल दर्ज किया गया है, उसने पिछले तमाम रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया है। इतिहास में शायद ही कभी ऐसा अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला हो जब महज सात दिनों के छोटे से अंतराल में देश की तिजोरी में सीधे 45 अरब डॉलर से अधिक की बंपर बढ़ोतरी हुई हो, जिसके बाद भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर अब 785.7 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर जा पहुंचा है। दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं जब इस समय मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के मुकाबले अपनी स्थानीय मुद्राओं की कमजोरी के दौर से जूझ रही हैं, ऐसे समय में भारत के फॉरेक्स रिजर्व में हुई यह विराट वृद्धि इस बात का सबसे बड़ा और ठोस प्रमाण है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अंदर से बेहद मजबूत, लचीली और सुरक्षित स्थिति में है।
रिजर्व बैंक की रणनीतिक चाल और विदेशी मुद्रा भंडार में अचानक आए इस महाउछाल की असली वजहें
भारतीय अर्थव्यवस्था को किसी भी बाहरी वैश्विक झटके या अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट से सुरक्षित रखने के लिए देश का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक हमेशा से फॉरेक्स रिजर्व को मजबूत करने की नीति पर काम करता रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि एक ही सप्ताह में 45 अरब डॉलर की यह जो ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, उसके पीछे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा भारतीय शेयर बाजार और डेट मार्केट में किया गया भारी निवेश तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का तगड़ा प्रवाह मुख्य वजह है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर विदेशी मुद्रा बाजार में की गई रणनीतिक खरीद और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने के लिए अपनाए गए कुशल प्रबंधन ने भी इस भंडार को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। जब दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देशों के केंद्रीय बैंक अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब भारत के पास 785.7 अरब डॉलर का यह विशालकाय विदेशी मुद्रा भंडार होना इस बात की पुख्ता गारंटी देता है कि देश किसी भी प्रकार की वैश्विक आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार और सक्षम है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा 785.7 अरब डॉलर का यह महा-भंडार
किसी भी उभरती हुई और विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार उस ऑक्सीजन की तरह होता है जो देश के आयात बिलों को चुकाने, विदेशी कर्ज का भुगतान करने और आपातकालीन आर्थिक संकट के समय देश की मुद्रा को टूटने से बचाने का काम करता है। भारत के लिए 785.7 अरब डॉलर का यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में भारत के बढ़ते हुए रसूख, उसकी साख और उसकी आर्थिक स्थिरता का सबसे बड़ा मुहर है। इस मजबूत बफर स्टॉक के होने से अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां और विदेशी निवेशक भारत में दीर्घकालिक निवेश करने के लिए और अधिक प्रोत्साहित होते हैं, क्योंकि उन्हें यह भरोसा होता है कि उनकी पूंजी पूरी तरह से सुरक्षित हाथों में है। इसके साथ ही, यह भंडार सरकार और रिजर्व बैंक को इस बात की पूरी छूट देता है कि वे बिना किसी दबाव के अपनी मौद्रिक नीतियों को स्वतंत्र रूप से संचालित कर सकें और घरेलू बाजार में महंगाई या आपूर्ति श्रृंखला की किसी भी बाधा को आसानी से मात दे सकें।
ग्लोबल इकॉनमी में भारत का बढ़ता दबदबा और मजबूत फॉरेक्स रिजर्व के दूरगामी सकारात्मक परिणाम
आज के दौर में जब वैश्विक भू-राजनीति में लगातार समीकरण बदल रहे हैं और सप्लाई चेन बाधित हो रही हैं, तब भारत का यह रिकॉर्डतोड़ विदेशी मुद्रा भंडार देश के लिए एक ऐसा अभेद्य किला बन चुका है जो किसी भी बाहरी आर्थिक तूफान को रोकने की ताकत रखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और वित्तीय संस्थानों के कुशल संचालन के चलते भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपना शीर्ष स्थान बनाए हुए है, और यह फॉरेक्स रिजर्व उसी आर्थिक सफलता की मुहर लगा रहा है। आने वाले महीनों में जब यह भंडार और अधिक मजबूत होगा, तो यह देश के भीतर बुनियादी ढांचा विकास, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए विदेशी पूंजी को आकर्षित करने में एक बड़ी ताकत साबित होगा। कुल मिलाकर, एक सप्ताह में 45 अरब डॉलर की यह छलांग और 785.7 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचना यह साबित करता है कि भारत का आर्थिक भविष्य सुरक्षित हाथों में है और देश विकास के एक नए स्वर्णिम युग की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।