सहारा रिफंड पोर्टल से 18 लाख से ज्यादा निवेशक 'गायब'; RTI में बड़ा खुलासा, आंकड़ों के हेरफेर से जमाकर्ताओं में हड़कंप!

सहारा रिफंड पोर्टल से 18 लाख से ज्यादा निवेशक 'गायब'; RTI में बड़ा खुलासा, आंकड़ों के हेरफेर से जमाकर्ताओं में हड़कंप!

सहारा इंडिया के करोड़ों निवेशकों के फंसे हुए धन की वापसी को लेकर चल रही कवायद के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। सहारा रिफंड पोर्टल पर रजिस्टर्ड 18 लाख से अधिक जमाकर्ताओं के आंकड़े अचानक 'गायब' होने की बात सामने आई है।

यह सनसनीखेज खुलासा उत्तर प्रदेश के बड़ौत (बागपत) निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट नौशाद अली द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई आधिकारिक जानकारी में हुआ है। केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त दो अलग-अलग आरटीआई जवाबों के आंकड़ों का जब मिलान किया गया, तो पोर्टल पर पंजीकृत निवेशकों की संख्या बढ़ने के बजाय लाखों में घट गई। इस विरोधाभास ने सहारा के पीड़ित निवेशकों और प्रशासनिक तंत्र में हलचल पैदा कर दी है।

पहली और दूसरी RTI के आंकड़ों में भारी अंतर, 18.67 लाख निवेशक रिकॉर्ड से गायब

आरटीआई कार्यकर्ता नौशाद अली ने केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय से दो बार औपचारिक जानकारी मांगी थी—पहली 24 अक्टूबर 2025 को और दूसरी 28 जुलाई 2026 को। पहली सूचना के जवाब में विभाग ने बताया कि 10 नवंबर 2025 तक पोर्टल पर कुल 1,67,96,469 जमाकर्ताओं ने अपना पंजीकरण कराया था। इनमें से 1,40,45,099 लोगों ने अपने दस्तावेज सफलतापूर्वक अपलोड कर दिए थे और कुल क्लेम की गई राशि 95,732.50 करोड़ रुपये थी। इस आंकड़े के अनुसार, 17 नवंबर 2025 तक 34,35,874 वैध जमाकर्ताओं को 6,621.85 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजा जा चुका था।

इसके विपरीत, जब 28 जुलाई 2026 की आरटीआई का उत्तर 3 सितंबर 2026 को दिया गया, तो कुल रजिस्टर्ड जमाकर्ताओं की संख्या घटकर मात्र 1,49,48,879 रह गई। पहले बताए गए 1.67 करोड़ से घटकर संख्या का 1.49 करोड़ पर आ जाना सीधे तौर पर 18,67,590 (करीब 18.67 लाख) निवेशकों के रिकॉर्ड से गायब होने की ओर इशारा करता है। आरटीआई एक्टिविस्ट नौशाद अली का कहना है कि केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय ने इस भारी अंतर को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है, जिससे यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इन निवेशकों के रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए गए या फिर सरकारी आंकड़ों में गंभीर गड़बड़ी हुई है।

41.56 लाख जमाकर्ताओं को ₹9,267 करोड़ का भुगतान, करोड़ों आवेदनों में पाई गईं कमियां

ताजा आरटीआई जवाब और 4 सितंबर 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 41,56,693 सत्यापित आवेदनों के एवज में 9,267.89 करोड़ रुपये की धनराशि बांटी जा चुकी है। हालांकि, सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि कुल 3,95,02,796 आवेदनों में गंभीर कमियां (Deficiencies) दर्ज की गई हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने 8 सितंबर 2026 को अद्यतन जानकारी देते हुए बताया था कि लगभग 41.56 लाख जमाकर्ताओं को 9,267 करोड़ रुपये वापस मिल चुके हैं और करीब 20 लाख नए आवेदन वर्तमान में प्रोसेसिंग की प्रक्रिया में हैं।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की निगरानी में प्रक्रिया, कमियां सुधारकर दोबारा करें क्लेम

सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, सहारा रिफंड की यह समूची प्रक्रिया 29 मार्च 2023 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के अनुपालन में संचालित की जा रही है। इस पूरी भुगतान व्यवस्था की निगरानी का जिम्मा सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी संभाल रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जिन जमाकर्ताओं के दावों में दस्तावेजों या विवरण के कारण कमियां पाई गई हैं और जिनका क्लेम सत्यापित नहीं हो सका है, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है।

ऐसे सभी निवेशकों के लिए 'CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल' पर री-सबमिशन (Re-submission) की विशेष सुविधा शुरू कर दी गई है। पीड़ित निवेशक आधिकारिक पोर्टल पर लॉगिन करके अपने आवेदन में दर्ज कमियों का विवरण देख सकते हैं और जरूरी दस्तावेजों को सुधारकर दोबारा अपना क्लेम दर्ज करा सकते हैं, ताकि सत्यापन के उपरांत उनका बकाया मूलधन सीधे खाते में भेजा जा सके।