दिल्ली से लेकर पटना तक अचानक बढ़े कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम,आपके शहर में कितना है रेट?

दिल्ली से लेकर पटना तक अचानक बढ़े कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम,आपके शहर में कितना है रेट?

साल के हर महीने की पहली तारीख देश के नागरिकों के लिए कई नए बदलाव, उम्मीदें और सरकारी नियम लेकर आती है, लेकिन इस बार सितंबर महीने की शुरुआत देश के आम उपभोक्ताओं, होटल कारोबारियों और छोटे दुकानदारों के लिए एक बहुत बड़े आर्थिक झटके के रूप में सामने आई है। जैसे ही कैलेंडर की सुई बदलकर 1 सितंबर पर आई, वैसे ही सरकारी तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन करते हुए बड़ा इजाफा कर दिया है। हालांकि राहत की बात यह है कि घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में फिलहाल कोई फेरबदल नहीं किया गया है, लेकिन होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, और कैंटीन चलाने वाले व्यापारियों के लिए इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। देश की राजधानी नई दिल्ली से लेकर बिहार की राजधानी पटना और देश के अन्य प्रमुख महानगरों तक कमर्शियल गैस सिलेंडर के नए और बढ़े हुए रेट लागू कर दिए गए हैं। इस अचानक हुई मूल्य वृद्धि से उन तमाम छोटे-बड़े कारोबारियों की चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं जो पहले से ही कोरोना काल के बाद से अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का सीधा संबंध हमारे खान-पान, होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, स्ट्रीट फूड स्टॉल, और टिफिन सेवाओं से होता है। जब भी कमर्शियल गैस के दाम बढ़ाए जाते हैं, तो उसका असर तुरंत उन तमाम चीजों पर पड़ता है जो हम बाजार में बाहर खाते-पीते हैं। सितंबर के पहले दिन जैसे ही गैस कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया, वैसे ही ढाबा और रेस्टोरेंट मालिकों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगीं। एक तरफ जहां कच्चा माल यानी दाल, चावल, सब्जियां और तेल पहले से ही महंगे बिक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खाना पकाने के लिए सबसे जरूरी माने जाने वाले ईंधन का महंगा होना उनके मुनाफे को पूरी तरह से निगल रहा है। कारोबारियों का कहना है कि यदि वे लगातार बढ़ रही इन लागतों के हिसाब से अपने खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाते हैं, तो उनके ग्राहक कम होने लगते हैं, और यदि दाम नहीं बढ़ाते हैं तो उन्हें अपनी जेब से नुकसान उठाना पड़ता है। इस प्रकार की महंगाई सीधे तौर पर देश के सर्विस सेक्टर और छोटे स्तर के व्यापारियों के व्यापार चक्र को बुरी तरह से प्रभावित करती है।

दिल्ली से लेकर पटना और देश के अन्य शहरों में क्या हुआ है नया रेट?

सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी किए गए नए रेट कार्ड के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई समेत देश के विभिन्न महानगरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में अलग-अलग मात्रा में वृद्धि दर्ज की गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर का नया रेट अब बढ़ गया है, जिससे वहां के दुकानदारों को प्रति सिलेंडर पहले से अधिक भुगतान करना होगा। इसी तरह, पूर्वी भारत के एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र पटना में भी कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतें ऊपर की ओर गई हैं, जिससे बिहार के स्थानीय कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ गया है। देश के अन्य महानगरों जैसे मुंबई और चेन्नई में भी नए और बढ़े हुए दाम लागू होने से कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका लगा है। हर शहर में ट्रांसपोर्टेशन और लोकल टैक्स के अंतर के कारण गैस की कीमतों में थोड़ा बहुत फर्क जरूर होता है, लेकिन कुल मिलाकर पूरे देश में इस बढ़ोतरी का असर एक समान रूप से महसूस किया जा रहा है।

क्या घरेलू गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं को मिली है इस बार कोई राहत?

जब भी एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने की खबरें आती हैं, तो देश की करोड़ों गृहणियों के दिलों की धड़कनें तेज हो जाना स्वाभाविक है, क्योंकि हर घर का बजट उसी रसोई गैस पर टिका होता है। इस बार के मूल्य संशोधन में तेल कंपनियों ने राहत की सांस देते हुए 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, और वे अपने पुराने दामों पर ही मिल रहे हैं। हालांकि, जानकारों का यह मानना है कि भले ही इस महीने घरेलू सिलेंडर के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर का महंगा होना अप्रत्यक्ष रूप से आम आदमी के जीवन को प्रभावित करता है। जब बाजार में बाहर खाना, चाय, और अन्य खाद्य पदार्थ महंगे हो जाते हैं, तो मध्यम वर्ग के लोगों को अपने मासिक खर्च में कटौती करनी ही पड़ती है। इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों के दौरान जिस तरह से सीएनजी, पीएनजी और दूध के दामों में लगातार इजाफा हुआ है, उसने आम नागरिक के बजट को पहले ही पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।

बढ़ती महंगाई के इस दौर में कारोबारियों और आम जनता की आगे की राह

सितंबर के पहले दिन मिले महंगाई के इस नए झटके ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या देश में ईंधन और ऊर्जा के दामों को नियंत्रित करने के लिए कोई अधिक प्रभावी नीति नहीं बनाई जानी चाहिए? अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और एलएनजी (LNG) के आयात मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव का हवाला देकर हर महीने इस तरह से दाम बढ़ाना आम जनता और छोटे व्यापारियों के लिए बेहद कष्टदायक साबित हो रहा है। सरकार और नीति निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विकास की इस दौड़ में छोटे कारोबारी और आम उपभोक्ता महंगाई की इस चक्की में न पिसें। फिलहाल तो देश के सभी शहरों में कमर्शियल गैस के बढ़े हुए दाम लागू हो चुके हैं और हर किसी को इसी नए वित्तीय गणित के साथ अपने काम को आगे बढ़ाना होगा। आने वाले त्योहारी सीजन से पहले इस तरह से गैस के दाम बढ़ना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में बाजार में महंगाई का यह दबाव और अधिक गहरा सकता है, जिससे निपटने के लिए हर परिवार और व्यापारी को अपनी आर्थिक योजनाओं में खासी सावधानी बरतनी होगी।