अयोध्या में राम मंदिर प्रशासन का बदलेगा पूरा सिस्टम! 3 नए ट्रस्टियों की एंट्री, जानें नाम

अयोध्या में राम मंदिर प्रशासन का बदलेगा पूरा सिस्टम! 3 नए ट्रस्टियों की एंट्री, जानें नाम

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अपने प्रशासनिक ढांचे में व्यापक फेरबदल करते हुए तीन नए न्यासियों (ट्रस्टियों) की औपचारिक नियुक्ति की है।

नए शामिल किए गए सदस्यों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के निवासी महेश भगचंदका, स्थानीय स्तर पर अयोध्या के निवासी मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। इस महत्वपूर्ण पुनर्गठन का मकसद मंदिर के दैनिक कामकाज और आगामी विकास परियोजनाओं की प्रशासनिक निगरानी को पहले से अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाना है।

अशोक सिंघल के रिश्तेदार समेत 3 प्रमुख चेहरों को मिली जिम्मेदारी

सामने आई जानकारी के मुताबिक, नए न्यासी महेश भगचंदका विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के दिवंगत शीर्ष नेता अशोक सिंघल के निकट संबंधी हैं। अयोध्या में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आधिकारिक आवास 'मणि राम दास छावनी' में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इन तीनों नामों पर गहन विचार-विमर्श के बाद सहमति की मुहर लगाई गई। इस बैठक में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी न सिर्फ इन नियुक्तियों को अंतिम रूप दे रहे हैं, बल्कि बोर्ड के भीतर रिक्त पड़े अन्य महत्वपूर्ण पदों को भरने की रूपरेखा पर भी विस्तृत चर्चा कर रहे हैं।

राम मंदिर को जल्द मिलेगा पहला प्रशासनिक सीईओ (CEO)

इस महत्वपूर्ण बैठक से एक और ऐतिहासिक प्रशासनिक फैसले की उम्मीद बंधी है। ट्रस्ट औपचारिक रूप से राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नाम की घोषणा करने की अंतिम तैयारी में है। नियुक्त होने वाले पहले सीईओ सीधे तौर पर पूरे मंदिर परिसर के संचालन, सुरक्षा तालमेल, दैनिक प्रशासनिक कामकाज और वित्तीय व्यवस्थाओं की सीधी निगरानी करेंगे। अयोध्या में जारी बैठकों के दौर के बीच माना जा रहा है कि मंदिर प्रबंधन को नया रूप देने के लिए यह घोषणा किसी भी समय हो सकती है।

दान विवाद और इस्तीफों के बाद तेज हुई प्रशासनिक कवायद

मंदिर परिसर में चढ़ावे और दान राशि से जुड़ी कथित अनियमितताओं व चोरी के आरोपों के बाद प्रशासनिक स्तर पर यह कड़ा कदम उठाया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के संस्थागत जिम्मेदारियों से जुड़े घटनाक्रम के बाद व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। आरोपों के सामने आने के बाद यह ट्रस्ट की तीसरी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक है, जिसमें स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रशासनिक नेतृत्व स्थापित करने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया गया है।

पूर्व IAS और IPS अफसरों के नामों पर अटकलें तेज

राम मंदिर के पहले सीईओ पद की दौड़ में कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के नाम चर्चा के केंद्र में हैं। संभावित दावेदारों में पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे और पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। वहीं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा का नाम भी चर्चा में रहा, हालांकि वे साक्षात्कार प्रक्रिया में उपस्थित नहीं हो सके थे। इसके अलावा पूर्व आईपीएस अधिकारी परेश सक्सेना का नाम भी चयन प्रक्रिया के गलियारों में गूंज रहा है, हालांकि ट्रस्ट ने फिलहाल अंतिम तीन चयनित नामों की सूची सार्वजनिक नहीं की है।

5,500 से अधिक आवेदनों की स्क्रीनिंग, 3 सदस्यीय समिति ने संभाली कमान

सीईओ पद के चयन को पूरी तरह मेरिट आधारित और निष्पक्ष बनाने के लिए 6 जुलाई को एक उच्चस्तरीय तीन सदस्यीय चयन समिति गठित की गई थी। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और विशेषज्ञ सुरेश हावरे शामिल रहे। इस प्रतिष्ठित पद के लिए देश भर से कुल 5,585 उम्मीदवारों ने दिलचस्पी दिखाते हुए आवेदन किया था, जिनमें से 3,570 अभ्यर्थियों ने सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर अपने आवेदन पत्र जमा किए थे।