दोनों में एक ही LPG गैस, फिर कमर्शियल सिलेंडर के दाम घटे पर घरेलू के क्यों नहीं? जानिए गैस का यह पेचीदा गणित

दोनों में एक ही LPG गैस, फिर कमर्शियल सिलेंडर के दाम घटे पर घरेलू के क्यों नहीं? जानिए गैस का यह पेचीदा गणित

एलपीजी (LPG) उपभोक्ताओं के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि जब 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल (व्यावसायिक) सिलेंडर और 14.2 किलोग्राम वाले डोमेस्टिक (घरेलू) सिलेंडर, दोनों के अंदर एक ही गैस (प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण) भरी होती है, तो उनके दामों में अंतर क्यों होता है? कई बार ऐसा देखा जाता है कि कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें 30 से 50 रुपये तक घट जाती हैं, लेकिन रसोई में इस्तेमाल होने वाले घरेलू सिलेंडर के दाम में एक रुपये की भी कटौती नहीं होती।

आम आदमी को यह गणित थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन तेल कंपनियों और सरकार के इस 'प्राइसिंग मैथ्स' के पीछे गहरे आर्थिक और रणनीतिक कारण होते हैं। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

1. टैक्स और ड्यूटी का बड़ा अंतर (Taxation Difference)

कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडरों पर लगने वाले टैक्स की दरें पूरी तरह अलग हैं।

  • घरेलू सिलेंडर: सरकार इसे एक आवश्यक वस्तु (Essential Commodity) मानती है, इसलिए इस पर केवल 5% GST लगाया जाता है।

  • कमर्शियल सिलेंडर: यह व्यावसायिक लाभ (होटल, रेस्तरां, फैक्ट्रियों) के लिए इस्तेमाल होता है, इसलिए इस पर सीधे 18% GST लगता है।

टैक्स का यह बड़ा अंतर दोनों सिलेंडरों की बेस प्राइस और फाइनल रिटेल प्राइस को अलग कर देता है। इसके अलावा, राज्य सरकारें और स्थानीय निकाय भी इन पर अलग-अलग तरह के सेस या शुल्क लगाते हैं।

2. सब्सिडी और सरकारी नियंत्रण (Subsidy & Government Protection)

घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होतीं, क्योंकि सरकार आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए कीमतों को नियंत्रित रखती है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल या एलपीजी के दाम आसमान छू रहे होते हैं, तब भी सरकार घरेलू सिलेंडरों के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़ाती। तेल कंपनियां इस नुकसान (Under-recovery) को खुद झेलती हैं या सरकार उन्हें सब्सिडी देती है। ऐसे में, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस के दाम घटते हैं, तो तेल कंपनियां सबसे पहले अपने पुराने घाटे की भरपाई करती हैं, न कि तुरंत घरेलू सिलेंडर के दाम घटाती हैं।

3. कमर्शियल सिलेंडर: पूरी तरह मार्केट-लिंक्ड (Direct Market Linked)

घरेलू सिलेंडर के विपरीत, कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर सरकार कोई सब्सिडी या प्राइस कैप (कीमत सीमा) नहीं लगाती। इनकी कीमतें पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतों और सऊदी अरामको के एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) पर निर्भर करती हैं। चूंकि कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें हर महीने बाजार के हिसाब से तय होती हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में जरा सी भी राहत मिलते ही तेल कंपनियां तुरंत कमर्शियल सिलेंडर के दाम घटा देती हैं। इसके विपरीत, बाजार में तेजी आने पर कमर्शियल सिलेंडर के दाम बहुत तेजी से बढ़ते भी हैं।

4. ब्लैक मार्केटिंग और डायवर्जन को रोकना

यदि घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में बहुत ज्यादा समानता आ जाए, तो कमर्शियल इस्तेमाल वाले लोग (जैसे ढाबे और रेस्तरां वाले) सस्ते घरेलू सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग और अवैध इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। दोनों के बीच एक निश्चित मूल्य अंतर (Price Gap) बनाए रखना प्रशासनिक रूप से भी जरूरी होता है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के हिस्से की गैस का व्यावसायिक दुरुपयोग न हो सके।

संक्षेप में कहें तो, यह गैस की क्वालिटी का नहीं बल्कि बाजार के नियमों, टैक्स स्लैब और सब्सिडी के मैनेजमेंट का गणित है। कमर्शियल सिलेंडर जहां सीधे तौर पर वैश्विक बाजार की लहरों पर तैरता है, वहीं घरेलू सिलेंडर को सरकार एक सुरक्षा कवच देकर रखती है, जिसके कारण उसकी कीमतों में स्थिरता बनी रहती है।

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