Share Market: कच्चे तेल में उबाल, बाजार का मूड खराब, सेंसेक्स के गोते में डूबे....करोड़

Share Market: कच्चे तेल में उबाल, बाजार का मूड खराब, सेंसेक्स के गोते में डूबे....करोड़

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अचानक आए जबरदस्त उबाल ने भारतीय शेयर बाजार की चाल पूरी तरह बिगाड़ दी है। बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दौर चला कि निवेशकों की गाढ़ी कमाई पलभर में पानी की तरह बह गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का तगड़ा चूना लगा है। वैश्विक स्तर पर जिंसों (Commodities) के दाम बढ़ने और सप्लाई चेन बाधित होने की आशंकाओं के बीच घरेलू बाजार का मूड पूरी तरह खराब हो चुका है। ट्रेडर्स और मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मिडिल ईस्ट या अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देशों में चल रहे तनाव के कारण क्रूड ऑयल के दाम तेजी से ऊपर चढ़ रहे हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस अनिश्चितता के माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार बिकवाली किए जाने से घरेलू बाजार का सेंटिमेंट बेहद कमजोर पड़ गया है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान के गहरे दायरे में कारोबार करने को मजबूर हो गए हैं।

महंगाई और राजकोषीय घाटे की आहट से निवेशकों में फैली गहरी घबराहट

कच्चे तेल में तेजी का सबसे बड़ा और सीधा असर देश की महंगाई दर (Inflation) और आयात बिल पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, ऐसे में क्रूड के दाम बढ़ने से सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। इसके अलावा देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका से मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत में भी भारी उछाल आ जाता है। इस पूरी चेन रिएक्शन के डर से शेयर बाजार में निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बन गया है। बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, मेटल और रियल्टी जैसे प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में भारी मुनाफावसूली और बिकवाली देखने को मिली है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव और अस्थिरता का दौर बना रह सकता है। छोटे और रिटेल निवेशकों को इस वोलेटाइल बाजार में बहुत संभलकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है ताकि वे भारी नुकसान से बच सकें।

वैश्विक संकेतों और तकनीकी स्तरों के बीच आगे कैसी होगी बाजार की चाल

मौजूदा भू-राजनीतिक हालात और आर्थिक आंकड़ों को देखते हुए आने वाले दिनों में शेयर बाजार की चाल काफी हद तक ग्लोबल संकेतों पर ही निर्भर करेगी। तकनीकी तौर पर देखें तो बेंचमार्क इंडेक्स अपने अहम सपोर्ट लेवल को तोड़कर नीचे फिसल चुके हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है। हालांकि, देश की मजबूत घरेलू आर्थिक वृद्धि (GDP Growth) और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी लंबे समय में बाजार को संबल देने का काम करती रही है, लेकिन तात्कालिक तौर पर क्रूड ऑयल की चाल ही बाजार के मूड की दिशा तय करेगी। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि निवेशकों को घबराहट में आकर अपने क्वालिटी स्टॉक्स को बेचने से बचना चाहिए और म्यूचुअल फंड्स या एसआईपी (SIP) के जरिए अनुशासित तरीके से निवेश जारी रखना चाहिए। इस बीच, बाजार नियामक और वित्त मंत्रालय की निगाहें भी वैश्विक बाजार की हर हलचल पर टिकी हुई हैं ताकि अर्थव्यवस्था और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।