इकोनॉमी के रनवे पर सुपर टेकऑफ, दुनिया पर जंग का संकट

इकोनॉमी के रनवे पर सुपर टेकऑफ, दुनिया पर जंग का संकट

आज की इस दुनिया पर नजर डालें तो हर तरफ अशांति, आर्थिक मंदी, सप्लाई चेन का टूटना और महाशक्तियों के बीच छिड़े युद्धों का काला साया मंडरा रहा है। दुनिया के कई विकसित देश इस वक्त महंगाई, ऊर्जा संकट और वित्तीय बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं, और वैश्विक अर्थव्यवस्था का पहिया थम सा गया है। ऐसे भयंकर और निराशाजनक वैश्विक माहौल के बीच भारत ने अपनी मजबूत और लचीली आर्थिक नीतियों के दम पर एक ऐसा करिश्मा कर दिखाया है जिसकी गूंज आज पूरी दुनिया की वित्तीय राजधानियों में सुनाई दे रही है। विपरीत परिस्थितियों और चौतरफा वैश्विक चुनौतियों को धता बताते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था ने इकोनॉमी के रनवे पर एक ऐसा सुपर टेकऑफ किया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। भारत ने इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी शानदार 7.8 प्रतिशत की धमाकेदार जीडीपी (GDP Growth Rate) दर हासिल करके यह साबित कर दिया है कि आज का भारत किसी भी बाहरी झटके से डरने वाला नहीं है बल्कि वह ग्लोबल ग्रोथ का नया इंजन बन चुका है।

कैसे संभव हुआ यह आर्थिक चमत्कार और क्या है इसके पीछे की ताकत?

जब दुनिया के बड़े-बड़े विश्लेषक यह मानकर बैठे थे कि वैश्विक युद्धों और मंदी का असर भारत की विकास दर पर भी गहरा पड़ेगा, तब देश के विनिर्माण क्षेत्र, बुनियादी ढांचे (Infrastructure), डिजिटल इकॉनमी और कृषि ने मिलकर एक मजबूत दीवार खड़ी कर दी। सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों से लगातार कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) यानी पूंजीगत खर्चों में जो भारी बढ़ोतरी की गई थी, उसका असर अब जमीन पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। देश के भीतर सड़कों, रेल मार्गों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में हो रहे अभूतपूर्व निवेश ने अर्थव्यवस्था के हर एक पहिए को तेजी से घुमाने का काम किया है। इसके अलावा, देश के युवाओं द्वारा संचालित स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल ट्रांजैक्शन की क्रांति और सेवा क्षेत्र (Services Sector) के बेजोड़ प्रदर्शन ने इस ग्रोथ रेट को 7.8 प्रतिशत के ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने में सबसे बड़ी और निर्णायक भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश के नाम संदेश और विजन

भारतीय अर्थव्यवस्था के इस शानदार प्रदर्शन और 7.8% की जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े सामने आने के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए देशवासियों के नाम एक बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह ऐतिहासिक वृद्धि इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत के सुधारवादी कदम, पारदर्शी नीतियां और 'सब का साथ, सबका विकास' का मंत्र सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर चाहे जितनी भी अनिश्चितताएं क्यों न हों, यदि देश के भीतर नीतियां स्पष्ट हों और जनता का परिश्रम साथ हो, तो कोई भी ताकत देश को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। प्रधानमंत्री ने देश के वैज्ञानिकों, उद्यमियों, किसानों, युवाओं और मेहनतकश श्रमिकों की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता हर एक भारतीय के अटूट संकल्प और पुरुषार्थ का परिणाम है, जो आने वाले समय में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाने के मार्ग को और अधिक प्रशस्त करेगी।

वैश्विक रेटिंग एजेंसियों और निवेशकों का भारत पर बढ़ता अटूट भरोसा

भारत की इस असाधारण 7.8% की जीडीपी ग्रोथ ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक (World Bank) और दुनिया भर की तमाम बड़ी रेटिंग एजेंसियों का ध्यान एक बार फिर से अपनी ओर खींच लिया है। आज दुनिया भर के विदेशी निवेशक (FIIs) और ग्लोबल कंपनियां चीन के विकल्प के रूप में भारत को सबसे सुरक्षित, भरोसेमंद और तेजी से उभरता हुआ बाजार मान रही हैं। देश में लगातार आ रहा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इस बात की गवाही देता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत की आर्थिक नींव कितनी मजबूत और चट्टान की तरह अडिग है। जानकारों का मानना है कि यदि भारत इसी गति से अपनी आर्थिक सुधार की रफ्तार को बनाए रखता है, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में देश दुनिया की तमाम आर्थिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए विकास की नई और अभूतपूर्व ऊंचाइयों को छू लेगा।

विकसित भारत के सपने की ओर तेजी से बढ़ता हुआ मजबूत कदम

आर्थिक मोर्चे पर मिली यह शानदार सफलता केवल एक तिमाही या साल का आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि 'विकसित भारत 2047' का जो सपना देश ने देखा है, वह अब केवल कल्पना नहीं बल्कि एक हकीकत बनता जा रहा है। दुनिया भर में जारी युद्ध और संघर्षों के माहौल के बीच जहां बड़े-बड़े देश लड़खड़ा रहे हैं, वहां भारत का यह सुपर टेकऑफ यह बताता है कि हमारे देश की आर्थिक बुनियाद कितनी गहरी और मजबूत है। आम नागरिक के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह जीडीपी ग्रोथ एक मील का पत्थर साबित होगी। आने वाला समय इस बात का गवाह बनेगा कि कैसे भारत ने विपरीत परिस्थितियों से लड़कर दुनिया के लिए विकास का एक नया और सुनहरा अध्याय लिखा है।