फेड के फैसले से अमेरिका में हाहाकार, 1100 अंक क्रैश हुआ मार्केट; पर भारत के सेंसेक्स ने दिखाया दम, रुपये में लौटी जबरदस्त जान!

फेड के फैसले से अमेरिका में हाहाकार, 1100 अंक क्रैश हुआ मार्केट; पर भारत के सेंसेक्स ने दिखाया दम, रुपये में लौटी जबरदस्त जान!

ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की बहुप्रतीक्षित नीतिगत बैठक के नतीजों के बाद अमेरिकी बाजारों में तहलका मच गया है। फेड चेयर के कड़े बयानों और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के चलते अमेरिकी शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स डॉव जोंस (Dow Jones) एक समय 1100 अंकों से भी ज्यादा क्रैश हो गया। लेकिन, इस वैश्विक सुनामी के बीच भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) ने अभूतपूर्व मजबूती दिखाई है। शुरुआती झटके के बाद घरेलू संस्थागत निवेशकों के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी न सिर्फ संभले, बल्कि हरे निशान में बंद हुए। वहीं दूसरी ओर, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (Indian Rupee) ने भी तगड़ी छलांग लगाई है।

फेडरल रिजर्व के किस फैसले से मची अमेरिकी बाजार में खलबली?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी जुलाई 2026 की बैठक में ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% की सीमा पर यथावत (Unchanged) रखने का फैसला किया है। हालांकि बाजार को दरें स्थिर रहने की उम्मीद थी, लेकिन हाहाकार मचने की असली वजह कुछ और ही रही:

  • 3 सदस्यों ने जताई असहमति (Dissenting Votes): फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के तीन सदस्यों ने इस फैसले का विरोध किया और वे ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी (Rate Hike) के पक्ष में थे। इससे बाजार में यह डर बैठ गया कि आने वाले महीनों (विशेषकर सितंबर) में अमेरिका फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

  • फॉरवर्ड गाइडेंस का अभाव: फेडरल रिजर्व ने भविष्य में दरों में कटौती को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया और कहा कि नीतियां पूरी तरह से महंगाई (Inflation) और मिडिल-ईस्ट के भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के आंकड़ों पर निर्भर करेंगी। इस सख्त रुख के कारण अमेरिकी निवेशकों में घबराहट फैल गई और टेक व भारी उद्योगों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई।

भारतीय बाजारों ने कैसे झेला वैश्विक झटका?

आमतौर पर जब भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व सख्त रुख अपनाता है, तो भारतीय बाजारों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) अपना पैसा निकालकर अमेरिका ले जाते हैं, जिससे भारतीय बाजार टूट जाते हैं। लेकिन इस बार भारतीय बाजार की कहानी बिल्कुल अलग रही:

  • सेंसेक्स और निफ्टी की शानदार रिकवरी: ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों के कारण आज सुबह बीएसई (BSE) सेंसेक्स और एनएसई (NSE) निफ्टी भारी गिरावट के साथ खुले थे। लेकिन निचले स्तरों पर डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) और रिटेल निवेशकों की आक्रामक लिवाली (Buying) के चलते बाजार ने यू-टर्न लिया। बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर के शेयरों ने बाजार को नीचे से खींचकर बाहर निकाला।

  • भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद: विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार की इस मजबूती के पीछे देश की मजबूत जीडीपी (GDP) ग्रोथ, स्थिर कॉर्पोरेट अर्निंग्स और घरेलू लिक्विडिटी का बड़ा हाथ है, जो इसे बाहरी झटकों से सुरक्षित (Cushion Effect) रखती है।

डॉलर के आगे दहाड़ा भारतीय रुपया, आई रिकॉर्ड मजबूती

फेड के फैसले के बाद वैश्विक मुद्रा बाजार (Currency Market) में अमेरिकी डॉलर में मुनाफावसूली देखी गई, जिसका सीधा फायदा भारतीय रुपये को मिला।

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपया आज सुबह मजबूती के साथ खुला और कारोबार के दौरान इसमें शानदार तेजी देखी गई। डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी और भारतीय बाजारों में घरेलू मजबूती के कारण रुपये में जोरदार जान लौट आई है। रुपये की इस मजबूती से भारत के आयात बिल (Import Bill) विशेषकर कच्चे तेल (Crude Oil) की खरीद पर होने वाले खर्च को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी, जो पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिर बना हुआ है।

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