ब्लैक सी से भारत क्या-क्या खरीदता है, जानिए क्यों हमारे लिए लाइफलाइन है काला सागर

ब्लैक सी से भारत क्या-क्या खरीदता है, जानिए क्यों हमारे लिए लाइफलाइन है काला सागर

काला सागर यानी Black Sea आज सिर्फ रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव की वजह से चर्चा में नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य जरूरतों और कृषि व्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ता बन चुका है। रूस, यूक्रेन, रोमानिया, बुल्गारिया और तुर्की जैसे देशों से घिरा यह समुद्री क्षेत्र वैश्विक कमोडिटी ट्रेड का एक बड़ा केंद्र है।

भारत के लिए काला सागर क्षेत्र इसलिए अहम है क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, कृषि उत्पाद, फर्टिलाइजर और औद्योगिक सामान अपेक्षाकृत कम परिवहन लागत में आयात किया जा सकता है। यह सप्लाई नेटवर्क भारत की ऊर्जा जरूरतों, खाद्य उपलब्धता और कृषि उत्पादन को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाता है।

भारत ब्लैक सी से सबसे ज्यादा क्या इंपोर्ट करता है?

रूस से कच्चा तेल बना भारत की ऊर्जा सप्लाई का बड़ा आधार

काला सागर क्षेत्र से भारत का सबसे बड़ा आयात कच्चा तेल यानी Crude Oil है। रूस का नोवोरोस्सियस्क बंदरगाह Black Sea Coast पर स्थित दुनिया के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनलों में शामिल है। यहां से यूराल्स क्रूड और साइबेरियन लाइट क्रूड जैसे तेलों का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में काफी बढ़ोतरी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्लैक सी के बंदरगाहों से भेजा जाने वाला तेल भारत के कुल रूसी क्रूड ऑयल आयात का करीब 28 प्रतिशत हिस्सा है। यही वजह है कि काला सागर भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

सूरजमुखी तेल के लिए भी Black Sea पर निर्भर है भारत

कच्चे तेल के अलावा खाने के तेल के आयात में भी काला सागर क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रूस, यूक्रेन और तुर्की दुनिया के प्रमुख सूरजमुखी तेल उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल हैं।

वैश्विक सूरजमुखी तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। अनुमान के मुताबिक, Black Sea Route दुनिया के लगभग 76 प्रतिशत सूरजमुखी तेल निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र से हर महीने लगभग 2 लाख से 2.5 लाख मीट्रिक टन सूरजमुखी तेल आयात करता है। भारत में खाद्य तेल की कीमतों और उपलब्धता को स्थिर रखने में इस सप्लाई रूट की अहम भूमिका है।

खेती के लिए जरूरी फर्टिलाइजर भी आता है ब्लैक सी क्षेत्र से

भारत का कृषि क्षेत्र भी काला सागर से जुड़े देशों पर काफी हद तक निर्भर करता है। यूरिया, पोटाश और फॉस्फेट जैसे महत्वपूर्ण उर्वरक यानी Fertilizers रूस और आसपास के देशों से भारत पहुंचते हैं।

ये पोषक तत्व देश में फसल उत्पादन बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। अगर फर्टिलाइजर सप्लाई में बाधा आती है तो इसका सीधा असर किसानों और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।

इसके अलावा भारत रोमानिया और बुल्गारिया जैसे देशों से औद्योगिक मशीनरी, स्पेशलिटी स्टील, गेहूं और सीमित मात्रा में कोयले का भी आयात करता है।

ब्लैक सी रूट भारत के लिए आर्थिक रूप से क्यों जरूरी है?

Black Sea Trade Route भारत के लिए कई आर्थिक फायदे लेकर आता है। समुद्री रास्ते से बड़ी मात्रा में सामान यानी Bulk Cargo कम लागत में लंबी दूरी तक पहुंचाया जा सकता है।

कम ट्रांसपोर्ट खर्च की वजह से कच्चा तेल, कृषि उत्पाद और अन्य जरूरी वस्तुएं भारत तक अपेक्षाकृत सस्ती कीमत पर पहुंचती हैं। खासतौर पर रूस से मिलने वाला डिस्काउंटेड क्रूड ऑयल इस व्यापार मार्ग की अहमियत को और बढ़ाता है।

वहीं, सूरजमुखी तेल और फर्टिलाइजर की नियमित सप्लाई भारत के घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करती है।

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