कच्चे तेल की कीमतों में क्यों आ रही है तेजी? अमेरिका-ईरान बातचीत के बाद भी क्रूड ऑयल के दाम चढ़ने की यह है असली वजह

कच्चे तेल की कीमतों में क्यों आ रही है तेजी? अमेरिका-ईरान बातचीत के बाद भी क्रूड ऑयल के दाम चढ़ने की यह है असली वजह

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर इन दिनों एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक बातचीत और ओमान के माध्यम से शांति समझौते की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ क्रूड ऑयल के दाम लगातार ऊपर चढ़ रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर एक बार फिर 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। भले ही दोनों देशों के बीच शुरू हुई इस बातचीत से भू-राजनीतिक मोर्चे पर कुछ राहत की उम्मीद जगी हो, लेकिन इसके बावजूद बाजार में तेजी बने रहने के पीछे कई ठोस और जटिल कारण जिम्मेदार हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अनिश्चितता और कड़े नियम

कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे इस उछाल का सबसे बड़ा और मुख्य कारण दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग यानी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता है। वैश्विक तेल और एलएनजी व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी मुख्य रास्ते से होकर गुजरता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के स्तर पर एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है जिसके तहत अमेरिका, इजराइल और अन्य देशों के कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं या भारी शुल्क वसूला जा सकता है। जब तक इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के पूरी तरह से सुरक्षित और सामान्य रूप से खुलने पर अंतिम मुहर नहीं लग जाती, तब तक ट्रेडर्स और निवेशकों के मन में सप्लाई बाधित होने का डर लगातार बना हुआ है।

शांति समझौतों पर पेंच और कड़े रुख

भले ही अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता से वार्ताओं के दौर की खबरें आ रही हैं, लेकिन दोनों पक्षों की शर्तों और प्राथमिकताओं में अभी भी भारी मतभेद बरकरार हैं। ईरान खाड़ी क्षेत्र में जहाजों के आने-जाने और सुरक्षा नियमों पर अपनी कड़ी निगरानी बनाए रखना चाहता है, जिसे पश्चिमी देश आसानी से स्वीकार करने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। जब तक कूटनीतिक वार्ताओं के बीच किसी स्थायी, पुख्ता और सर्वमान्य समझौते पर मुहर नहीं लगती, तब तक ग्लोबल मार्केट का 'भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम' ऊंचा ही रहता है, जिसका सीधा असर तेल की बढ़ती कीमतों के रूप में दिखाई देता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा के जोखिम और ट्रांसपोर्टेशन लागत

औपचारिक वार्ताओं का दौर चलने के बावजूद जमीन पर सुरक्षा के लिहाज से तनाव पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। लाल सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर मिलने वाली चेतावनियों ने शिपिंग कंपनियों की चिंता को बढ़ा रखा है। संभावित खतरों से बचने के लिए कई कार्गो जहाजों को अब लंबे और महंगे समुद्री रूटों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिसके कारण ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट यानी परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही है और ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

Latest Posts