कोरोना की नई लहर पहले से विकराल, लॉकडाउन की अफवाहों से सहमे लोग

स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में बढ़ते कोरोना केसों पर जताई चिंता

नेशनल डेस्क। कोरोना संक्रमण की नई लहर पहले से अधिक विकराल है। पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना संक्रमण के 72,330 नए मामले आए हैं। मौतों का आंकड़ों में भी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले चौबीस घंटों में 459 लोगों की मौत हो गई है। इस समय देश में 5,84,055 एक्टिव केस हैं और लगातार एक्टिव केसों की तादाद में इजाफा हो रहा है। वैक्सीनेशन के बावजूद कई लोगों के संक्रमित होने तथा दोबारा लॉकडाउन लगने की अफवाहों से आम लोग भयभीत हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले 10 अक्टूबर से कोरोना केसों में लगातार कमी आ रही थी, लेकिन कोरोना केसों में एक बार फिर तेजी से इजाफा हुआ है।महाराष्ट्र कस हालात बेहद गंभीर हैं। महाराष्ट्र के कई शहरों में नाइट कर्फ्यू से लेकर अन्य तमाम पाबंदियों को लागू किए जाने के बाद भी हालात खतरनाक होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को महाराष्ट्र समेत अन्य कई राज्यों में बढ़ते कोरोना केसों पर चिंता जताई थी।

इसी तरह दिल्ली और पंजाब में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। दिल्ली में एक दिन में ही 1,819 कोरोना के नए केस मिले हैैं और 11 लोगों की मौत हुई है। फिलहाल इस समय दिल्ली में एक्टिव केसों की संख्या 8,838 के पार पहुंच गई है। पंजाब में भी कोरोना के कहर के चलते कई शहरों में नाइट कर्फ्यू लगा है। लखनऊ समेत कई जगहों पर वैक्सीनेशन के बावजूद कुछ लोगों के संक्रमित होने की ख़बरों से लोग भयाक्रांत हैं।

कोरोना वायरस की नई लहर के बीच देश में दोबारा लॉकडाउन की अफवाहों से आम लोग सहमे हुए हैं। एक-दूसरे से मिलने पर लोग होली की बधाई देने से पहले लॉकडाउन लगने की बात पूछते हैं। अफवाहों के भी से हजारों प्रवासी कामगार होली के पहले ही घर वापसी कर चुके हैं। अब जो कामगार घर आ चुके हैं वो दोबारा लौटने को तैयार नहीं हैं। अगर कोई कामगार काम पर वापस जाने की इच्छा भी प्रकट करता है तो घर और गांव वाले मना कर देते हैं।

इन हालातों में देश के महानगरों में कामगारों के अभाव के चलते कारोबार प्रभावित हो रहे हैं। फिलहाल बड़े कारोबारी अभी कामगारों के आने की बाट जोह रहे हैं। ध्यातव्य है कि देश के महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों में पूरा का पूरा कारोबार यूपी, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के प्रवासी कामगारों पर निर्भर है। यह बात दीगर है कि देश की उत्पादकता को बढ़ाने वाले इन प्रवासी कामगारों का कोई पुरसाहाल नहीं है।

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