Up kiran,Digital Desk : दिल्ली नगर निगम (MCD) की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में विस्तार की कोशिशों में जुटी आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में लगातार दूसरे साल मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव से पीछे हटने का फैसला किया है। इस फैसले ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए बिना लड़े जीत का रास्ता साफ कर दिया है। आगामी 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए 'आप' ने अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है।
क्यों पीछे हटी अरविंद केजरीवाल की पार्टी?
आम आदमी पार्टी के पार्षद और सदन में विपक्ष के नेता अंकुश नारंग ने स्पष्ट किया कि पार्टी 'हॉर्स ट्रेडिंग' (पार्षदों की खरीद-फरोख्त) के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा, "हम चाहते तो संख्याबल जुटा सकते थे, क्योंकि कई पार्षद मौजूदा व्यवस्था से खुश नहीं हैं। लेकिन हमने भाजपा को वॉकओवर देने का फैसला किया है।" हालांकि, पार्टी ने स्टैंडिंग कमेटी के एक रिक्त पद के लिए शालीमार बाग से पार्षद जलज चौधरी को मैदान में उतारा है।
दिल्ली नगर निगम का गणित (250 सीटें)
मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में केवल पार्षद ही नहीं, बल्कि दिल्ली के सांसद और विधायक भी मतदान करते हैं। वर्तमान समीकरण भाजपा के पक्ष में झुका हुआ है:
भाजपा (BJP): 123 पार्षद + सांसद/विधायक = कुल 141 वोट।
आम आदमी पार्टी (AAP): 100 पार्षद + विधायक = कुल 106 वोट।
कांग्रेस (Congress): 09 पार्षद।
अन्य: 15 (इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी), 1 निर्दलीय और 1 फॉरवर्ड ब्लॉक।
भाजपा और कांग्रेस की तैयारी
भाजपा: मेयर पद के लिए भाजपा बेगमपुर से पार्षद जय भगवान यादव, महिपालपुर के इंद्रजीत सहरावत और वर्तमान मेयर राजा इकबाल सिंह के नामों पर विचार कर रही है।
कांग्रेस: जहां 'आप' ने मैदान छोड़ दिया है, वहीं कांग्रेस ने मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों के लिए उम्मीदवार उतारने का साहसिक फैसला लिया है, भले ही उनके पास संख्याबल कम है।
29 अप्रैल को 5 पदों पर होगा घमासान
29 अप्रैल को न केवल मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होगा, बल्कि स्टैंडिंग कमेटी के तीन सदस्यों के लिए भी मतदान किया जाएगा। 18 सदस्यीय इस ताकतवर कमेटी में फिलहाल भाजपा का वर्चस्व है। 'आप' के मैदान छोड़ने से भाजपा न केवल मेयर पद पर काबिज रहेगी, बल्कि स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन पद पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर लेगी।




