धनतेरस 12 या 13 नवंबर को? जानिए क्या है सही तिथि और पूजन विधि और क्यों मनाया जाता है पर्व

गुरुवार से शुक्रवार 13 नवंबर की संध्या करीब 6:00 बजे तक कुल 4 खरीदारी के शुभ मुहूर्त पड़ रहे हैं। धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सोना, चांदी और पीतल की वस्तुएं खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। 

नई दिल्ली। इस बार धनतेरस का पर्व 13 नवंबर को है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। हालांकि 12 नवंबर यानी आज रात्रि 9:30 बजे से त्रयोदशी का शुभारंभ हो रहा है।

Dhanteras

गुरुवार से शुक्रवार 13 नवंबर की संध्या करीब 6:00 बजे तक कुल 4 खरीदारी के शुभ मुहूर्त पड़ रहे हैं। धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सोना, चांदी और पीतल की वस्तुएं खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।

धनतेरस का शुभ मुहूर्त

दरअसल, धनतेरस का शुभ मुहूर्त 12 नवंबर कि रात्रि 11:30 से 1:00 तक 1:07 तक उसके बाद 2:45 से अगले दिन सुबह 5:57 तक होगी।वहीं, शुक्रवार को सुबह 5:59-10:06 बजे तक और 11:08 बजे से 12:51 बजे तक है। इसके अलावा 3:38 से संध्या 5:00 बजे तक भी आप धनतेरस की खरीदारी कर सकते हैं।

27 मिनट तक ही पूजा का अति शुभ मुहूर्त

इस साल धनरेसस पूजन का अति शुभ मुहूर्त केवल 27 मिनट के लिए ही होगा। शाम 5:32 से 5:59 मिनट तक आप पूजा कर लें। इस दौरान पूजा करना फलदायी साबित होगा।

धनतेरस क्यों मनाया जाता है

धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि जिस समय समुद्र मंथन हो रहा था, उसी समय भगवान धनवंतरि एक रत्न के रूप में समुद्र मंथन से बाहर आ गए थे। धनतेरस के शुभ अवसर पर धनवंतरि के साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर जी की आराधना भी की जाती है। दीपावली के पर्व का शुभारंभ धनतेरस से ही होता है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन घर में नई चीजें लाने से घर में धन की देवी माता लक्ष्मी और धन के देवता माने जाने वाले भगवान कुबेर का वास होता है। इस दिन नई झाड़ू खरीदना अच्छा माना जाता है। इस दिन झाड़ू खरीदने का कारण यह है कि झाड़ू में माता लक्ष्मी का वास माना गया है। अगर धनतेरस पर आप झाड़ू खरीदकर लाते हैं तो कहा जाता है कि घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है. सोना, चांदी और पीतल की वस्तुओं को खरीदना बेहद शुभ माना गया है।

धनतेरस की पूजा करने की विधि

1. पूजा करने से पहले स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें.
2. इसके बाद एक साफ चौकी पर गंगाजल छिड़क कर उस पर पीला या लाल रंग का कपड़ा बिछाएं.
3. इस कपड़े पर प्रभु श्री गणेश, माता लक्ष्मी, मिट्टी का हाथी, भगवान धनवंतरि और भगवान कुबेर जी की मूर्तियां स्थापित करें.
4. सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन करें, उन्हें पुष्प और दूर्वा अर्पित करें.
5. इसके बाद हाथ में अक्षत लेकर भगवान धनवंतरि का मनन करें.

6. अब भगवान धनवंतरि को पंचामृत से स्नान कराकर, रोली चंदन से तिलक कर उन्हें पीले रंग के फूल अर्पित करें.
7. फूल अर्पित करने के बाद फल और नैवेद्य अर्पित कर उन पर इत्र छिड़ककर भगवान धनवंतरि के मंत्रों का जाप कर उनके आगे तेल का दीपक जलाएं.
8. इसके बाद धनतेरस की कथा पढ़ें और आरती करें.
9.अब भगवान धनवंतरि को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाकर माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा भी करें.
10. पूजा समाप्त करने के बाद घर के मुख्य द्वार के दोनों और तेल का दीपक जरूर जलाएं.

धनतेरस पर इन जगहों पर रखें दीपक

धनतेरस के खास अवसर पर घर के अलावा पीपल के पेड़ के नीचे और श्मशान के पास भी दीपक रखे जाते हैं. आप भी जानिए इन जगहों पर दीपक रखने का महत्व.

1. घर के मुख्य द्वार पर- धनतेरस के दिन अपने घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और धन-धान्य की प्राप्ति होती है.
2. बाथरूम में- शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि माता लक्ष्मी आपके घर में कहीं से भी प्रवेश कर सकती हैं. इसलिए घर के बाथरूम में भी एक दीपक जरूर रखें.

3. पीपल के पेड़ के नीचे- धनतेरस पर्व के अवसर पर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा आप पर बनी रहेगी. पीपल में समस्त देवी-देवताओं का वास माना गया है.
4. श्मशान के समीप- धनतेरस के अवसर पर श्मशान के समीप दीपक रखना भी बहुत शुभ फलकारी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि श्मशान के समीप इस दिन दीया जलाने से मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहती है.

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