कभी बॉलीवुड की टॉप सिंगर थीं अनुराधा पौडवाल, फिर करियर के शिखर पर लिया बड़ा फैसला, 1 झटके में बदल गई पूरी जिंदगी

कभी बॉलीवुड की टॉप सिंगर थीं अनुराधा पौडवाल, फिर करियर के शिखर पर लिया बड़ा फैसला, 1 झटके में बदल गई पूरी जिंदगी

80 और 90 के दशक में अपनी मधुर और सुरीली आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली अनुराधा पौडवाल की गिनती बॉलीवुड के सबसे सफल पार्श्व गायिकाओं में होती है। उन्होंने लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी महान गायिकाओं के दौर में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाई थी। 'आशिकी', 'दिल है कि मानता नहीं', 'बेटा', और 'सड़क' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के सुपरहिट गानों ने उन्हें सफलता के उस शिखर पर पहुंचा दिया था, जहां हर गायिका पहुंचने का सपना देखती है। उस दौर में अनुराधा पौडवाल को लगातार तीन बार सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था और हर बड़े संगीतकार और फिल्म निर्माता की वे पहली पसंद बन चुकी थीं।

करियर के चरम पर लिया वो हैरान कर देने वाला फैसला: क्यों बनाई बॉलीवुड से दूरी?

जब अनुराधा पौडवाल अपने फिल्मी करियर के सबसे सुनहरे और शीर्ष दौर में थीं, तब उन्होंने एक ऐसा अप्रत्याशित और चौंकाने वाला निर्णय लिया जिसने पूरे बॉलीवुड और संगीत उद्योग को हिलाकर रख दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐलान कर दिया कि वे अब केवल टी-सीरीज (T-Series) कंपनी के लिए ही गाएंगी और किसी अन्य फिल्म प्रोडक्शन हाउस या संगीतकार के साथ काम नहीं करेंगी। इसके साथ ही उन्होंने केवल भजन और भक्ति संगीत गाने पर ध्यान केंद्रित करने का मन बना लिया। उनके इस फैसले से उस समय के दिग्गज संगीत निर्देशक और निर्माता हैरान रह गए, क्योंकि एक स्थापित और मांग में रहने वाली गायिका द्वारा अपने करियर के चरम पर ऐसा कदम उठाना किसी के गले नहीं उतर रहा था।

एक फैसले ने रातों-रात बदल दी पूरी जिंदगी: भक्ति संगीत की दुनिया में रचा नया इतिहास

बॉलीवुड फिल्मों से दूरी बनाने के बाद अनुराधा पौडवाल की जिंदगी का नया अध्याय शुरू हुआ, जिसने उन्हें भारत के कोने-कोने में भक्ति संगीत की देवी बना दिया। उन्होंने 'गायत्री मंत्र', 'हनुमान चालीसा', 'दुर्गा अमृतवाणी' और अनगिनत धार्मिक भजनों को अपनी भावपूर्ण आवाज दी। उनके गाए भक्ति गीतों और भजनों के कैसेट्स व सीडी ने बिक्री के नए रिकॉर्ड स्थापित किए। हालांकि फिल्मी गानों से दूर होने के कारण उनके मुख्यधारा के बॉलीवुड करियर पर असर पड़ा, लेकिन उन्होंने भक्ति संगीत के क्षेत्र में जो मुकाम और सम्मान हासिल किया, वह अतुलनीय था। उनके इस फैसले ने न केवल उनकी व्यक्तिगत जिंदगी की दिशा बदल दी, बल्कि उन्हें देश भर के आध्यात्मिक घर-घर में एक अमर आवाज बना दिया।

पद्म श्री से सम्मान और आज का सफर: अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने की एक बेमिसाल मिसाल

अनुराधा पौडवाल द्वारा अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने और संगीत जगत में अमूल्य योगदान देने के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से सम्मानित किया। आज भी जब 90 के दशक के रोमांटिक गानों का जिक्र होता है, तो अनुराधा पौडवाल की सुरीली आवाज का जादू हर किसी के जेहन में तरोताजा हो जाता है। फिल्मी दुनिया की चकाचौंध और प्रतिस्पर्धा को छोड़कर भक्ति और आध्यात्म का रास्ता चुनना अनुराधा पौडवाल के अटूट विश्वास को दर्शाता है। उनका जीवन इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि सफलता केवल प्रसिद्धि और पैसों से नहीं, बल्कि आत्म-संतुष्टि और अपने बनाए सिद्धांतों पर चलने से मिलती है।