पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का अधूरा रह गया सपना; देव आनंद के इकलौते बेटे सुनील आनंद ने दुनिया को कहा अलविदा

पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का अधूरा रह गया सपना; देव आनंद के इकलौते बेटे सुनील आनंद ने दुनिया को कहा अलविदा

हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग के महानायक देव आनंद के परिवार से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। लीजेंड्री अभिनेता देव आनंद के बेटे और पूर्व अभिनेता सुनील आनंद का ब्रिटेन में 70 वर्ष की आयु में हृदयाघात (हार्ट अटैक) के कारण निधन हो गया है। सुनील आनंद ने अपने जीवन के चार लंबे दशक अपने पिता के साथ बिताए थे और उनके बैनर 'नवकेतन फिल्म्स' की देखरेख से लेकर उनके स्वास्थ्य और कार्यक्रमों का प्रबंधन बखूबी संभाला था। उनके निधन से फिल्म जगत और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई है।

'शो चलता रहेगा': पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का था संकल्प

अपने एक पुराने साक्षात्कार में सुनील आनंद ने दुनिया भर के प्रशंसकों से देव आनंद को आज और उनके निधन के वर्षों बाद भी मिल रहे अथाह प्यार को याद करते हुए एक बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें आज भी अपने पिता की उपस्थिति का अहसास होता रहता है। सुनील के अनुसार, देव आनंद आज भी दुनिया भर के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा के बड़े स्रोत हैं और वे एक सदाबहार रोमांटिक स्टार के रूप में हमेशा अमर रहेंगे। उन्होंने कहा था कि "शो चलता रहेगा" और वे अपने पिता के सपनों को कभी नहीं मरने देंगे।

पिता को समर्पित एक भव्य फिल्म बनाने पर कर रहे थे काम

महज अभिनय तक सीमित न रहते हुए सुनील आनंद एक फिल्म निर्माता और निर्देशक के रूप में भी सक्रिय थे। पीटीआई को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया था कि वह अपने दिवंगत पिता देव आनंद को समर्पित एक भव्य फिल्म बना रहे हैं, जिसमें भारत के साथ-साथ हॉलीवुड और इंग्लैंड के कलाकार भी शामिल होने वाले थे। उन्होंने गर्व से कहा था कि वह अपने पिता की महान विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और काम हमेशा जारी रहेगा।

देव आनंद को बताया बेहद विनम्र और जमीन से जुड़ा इंसान

सुनील आनंद ने अपने पिता देव आनंद की शख्सियत के कई अनछुए पहलुओं से पर्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि अपार प्रसिद्धि और स्टारडम होने के बावजूद देव आनंद बेहद विनम्र और जमीन से जुड़े हुए इंसान थे। वे बेहद पढ़े-लिखे और प्रबुद्ध व्यक्ति थे जो किसी भी भीड़ में किसी से भी किसी भी विषय पर सहजता से चर्चा कर सकते थे। सुनील के शब्दों में, वे आम आदमी के साथ भी उतने ही सहज और सरल थे जितने कि राजघरानों के लोगों के साथ, और इतने बड़े मेगास्टार होने के बावजूद उनका ऐसा सरल स्वभाव वाकई प्रेरणादायक था।

अभिनय करियर और चार दशकों का लंबा सफर

सुनील आनंद ने अपने पिता द्वारा निर्देशित फिल्म 'आनंद और आनंद' (1984) के जरिए सिल्वर स्क्रीन पर अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने 'कार थीफ', 'मैं तेरे लिए' और 'मास्टर' जैसी फिल्मों में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। सुनील ने देव आनंद के साथ अपने जीवन के चार दशक बिताए और साल 2008 में कान फिल्म महोत्सव (Cannes Film Festival) में उनकी क्लासिक फिल्म 'गाईड' की स्पेशल स्क्रीनिंग का शानदार समन्वय भी किया था, जिसे उन्होंने भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक गौरवशाली और ऐतिहासिक क्षण बताया था। गौरतलब है कि देव आनंद और उनकी पत्नी व अभिनेत्री कल्पना कार्तिक के दो बच्चे थे, जिनमें सुनील और उनकी बहन देवना शामिल हैं। वहीं, महान अभिनेता देव आनंद का निधन साल 2011 में 88 वर्ष की आयु में हुआ था, और अब उनके बेटे के निधन से एक युग का अंत हो गया है।

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