Explained: बिजनेसमैन संजय कपूर वसीयत और संपत्ति विवाद, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पर क्या-क्या कहा? कहां फंसा है पेंच

Explained: बिजनेसमैन संजय कपूर वसीयत और संपत्ति विवाद, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पर क्या-क्या कहा? कहां फंसा है पेंच

परिचय और मुख्य अपडेट

दिवंगत व्यवसायी और उद्योगपति संजय कपूर की अरबों रुपए की संपत्ति और 'आरके फैमिली ट्रस्ट' (RK Family Trust) को लेकर चल रहा हाई-प्रोफाइल पारिवारिक विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। करीब 30,000 करोड़ रुपये से अधिक के इस वसीयत और संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम अपडेट देते हुए कहा है कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता (Mediation) की प्रक्रिया काफी संतोषजनक ढंग से आगे बढ़ रही है। शीर्ष अदालत ने इस बात पर प्रसन्नता जताई है कि परिवार के सभी सदस्य इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता पर अहम टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इतने बड़े और जटिल पारिवारिक झगड़ों को लंबी अदालती लड़ाइयों में खींचने के बजाय आपसी बातचीत से सुलझाना ज्यादा बेहतर है। कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की देखरेख में चल रही मध्यस्थता कार्यवाही के लिए समय सीमा को बढ़ाकर 2 नवंबर तक कर दिया है। अदालत ने सभी पक्षों को यह सलाह दी है कि वे खुले दिल और खुले दिमाग से इस प्रक्रिया में हिस्सा लें ताकि इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद का एक स्थाई और समग्र समाधान निकल सके।

कहां फंसा है असली पेंच और क्या है विवाद?

यह पूरा कानूनी पेंच दिवंगत संजय कपूर की वसीयत (Will) और उनके पारिवारिक ट्रस्ट के नियंत्रण को लेकर है। एक तरफ जहां संजय कपूर की 80 वर्षीय मां रानी कपूर ने अक्टूबर 2017 में बने 'आरके फैमिली ट्रस्ट' और वसीयत से जुड़े दस्तावेजों को फर्जी, धोखाधड़ी और मनगढ़ंत करार देते हुए इसे चुनौती दी है, वहीं दूसरी तरफ संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर और परिवार के अन्य पक्षों के बीच एसेट्स के मालिकाना हक को लेकर तीखा टकराव चल रहा है। इसके अलावा, संजय कपूर की पहली पत्नी और बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों (समायरा और कियान) ने भी वसीयत और संपत्तियों के वितरण पर अपने कानूनी अधिकार का दावा किया है, जिसके चलते यह मामला देश के सबसे जटिल कानूनी विवादों में शुमार हो गया है।

निष्कर्ष और आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में सभी पक्षों को चेताया है कि यदि यह आपसी मध्यस्थता की कोशिश विफल होती है, तो अदालत उन्हें कानून के अनुसार आगे बढ़ने की अनुमति दे देगी, लेकिन सभी की कोशिश यही होनी चाहिए कि नौबत उस दिन तक न पहुंचे। फिलहाल चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और टैक्स एक्सपर्ट्स की मदद से ट्रस्ट के कॉर्पस और संपत्तियों के दावों पर मंथन जारी है, और सभी की निगाहें आगामी 2 नवंबर को आने वाली मध्यस्थता रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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