'पुरुषों में ज्यादा इनसिक्योरिटी होती है', सेट पर झगड़े की धारणा पर राधिका आप्टे बोलीं- यह मर्द या औरत की बात नहीं
भारतीय सिनेमा में अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता और बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री राधिका आप्टे हमेशा सामाजिक और फिल्म उद्योग से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर मुखर होकर अपनी राय रखती हैं। अक्सर यह देखा गया है कि जब भी दो अभिनेत्रियां किसी फिल्म या वेब सीरीज में एक साथ काम करती हैं, तो मीडिया और गॉसिप गलियारों में उनके बीच अनबन, कैटफाइट (Catfight) या इनसिक्योरिटी की खबरें तेजी से फैलने लगती हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब राधिका आप्टे से सेट पर होने वाले ऐसे झगड़ों और दो अभिनेत्रियों के बीच की ट्यूनिंग को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पारंपरिक धारणा को पूरी तरह से खारिज कर दिया। राधिका ने कहा कि सेट पर इनसिक्योरिटी या मतभेद का संबंध किसी जेंडर यानी महिला या पुरुष होने से नहीं है, बल्कि यह किसी भी इंसान के व्यक्तिगत व्यवहार पर निर्भर करता है।
'यह मर्द या औरत की बात नहीं, पुरुषों में भी होती है भारी इनसिक्योरिटी': राधिका आप्टे की बेबाक दलील
अपनी बात को गहराई से समझाते हुए राधिका आप्टे ने कहा कि जब लोग दो महिलाओं को एक साथ काम करते देखते हैं, तो समाज बहुत जल्दी यह मान लेता है कि उनके बीच जलन या प्रतिस्पर्धा होगी। लेकिन हकीकत में ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए खुलासा किया कि उन्होंने महिला कलाकारों के साथ काम करते हुए बेहद खुशनुमा और सपोर्टिव माहौल देखा है। इसके विपरीत, राधिका ने जोर देकर कहा कि पुरुषों में भी इनसिक्योरिटी और ईगो से जुड़ी समस्याएं काफी ज्यादा देखने को मिलती हैं, लेकिन उनके बारे में मीडिया में उस तरह से चर्चा नहीं की जाती जिस तरह से महिलाओं के मामलों को तूल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक रूढ़िवादी सोच है कि महिलाएं ही एक-दूसरे से जलती हैं या साथ काम नहीं कर सकतीं।
फिल्म इंडस्ट्री में जेंडर स्टीरियोटाइप और मीडिया के नजरिए पर उठाए कड़े सवाल
राधिका आप्टे ने इस बात पर भी गहरा दुख और नाराजगी जताई कि कैसे फिल्म इंडस्ट्री और मीडिया लंबे समय से एक खास जेंडर को लेकर धारणाएं बनाते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब दो मेल एक्टर्स के बीच झगड़ा या वैनिटी वैन को लेकर विवाद होता है, तो उसे 'क्रिएटिव डिफरेंस' यानी रचनात्मक मतभेद का नाम देकर टाल दिया जाता है। वहीं, अगर दो फीमेल एक्टर्स के बीच हल्की सी बातचीत बंद हो जाए या कोई बात हो जाए, तो उसे तुरंत 'कैटफाइट' या 'पर्सनल दुश्मनी' बनाकर हेडलाइंस में चला दिया जाता है। राधिका ने कहा कि यह दोहरा रवैया अब पूरी तरह से बंद होना चाहिए क्योंकि आज की महिलाएं एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय एक-दूसरे को सशक्त बनाने और सपोर्ट करने में विश्वास रखती हैं।
प्रोफेशनल स्पेस में सम्मान और समझदारी की जरूरत: राधिका आप्टे का संदेश
अंतिम बातचीत में राधिका आप्टे ने कहा कि किसी भी फिल्म या प्रोजेक्ट के सेट पर सबसे ज्यादा मायने यह रखता है कि कलाकार कितने पेशेवर (Professional) हैं। जब दो लोग एक साथ काम करते हैं, तो चाहे वे पुरुष हों या महिला, उनके बीच काम करने का तरीका और आपसी समझ सबसे महत्वपूर्ण होती है। राधिका के इस बयान की सोशल मीडिया पर फैंस और कई सह-कलाकारों द्वारा जमकर तारीफ की जा रही है। लोगों का कहना है कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के उस छिपे हुए सच और रूढ़िवादिता पर सीधा प्रहार किया है, जिस पर अमूमन लोग खुलकर बात करने से कतराते हैं। राधिका आप्टे का यह बेबाक अंदाज एक बार फिर साबित करता है कि वे न केवल एक उम्दा अभिनेत्री हैं बल्कि समाज के नजरिए को बदलने की हिम्मत भी रखती हैं।