संजय दत्त ने बयां किया बॉलीवुड का कड़वा सच, बोले- 'अब परिवार जैसी नहीं रही फिल्म इंडस्ट्री, साउथ से सीखें एकता'
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता 'संजय बाबा' यानी संजय दत्त (Sanjay Dutt) अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री (Bollywood) की मौजूदा स्थिति और अंदरूनी माहौल को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और भावुक बयान दिया है। संजय दत्त ने बॉलीवुड में बढ़ते कॉम्पिटिशन और कलाकारों के बीच आपसी तालमेल की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि आज की फिल्म इंडस्ट्री वैसी नहीं रही जैसी उनके शुरुआती दौर में हुआ करती थी, जहां हर कोई एक-दूसरे को सपोर्ट करता था।
बॉलीवुड की मौजूदा हालत से दुखी हैं 'संजय बाबा'
एक हालिया इंटरव्यू में जब संजय दत्त से फिल्म इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही दुखी मन से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "आज की फिल्म इंडस्ट्री अब एक परिवार की तरह महसूस नहीं होती। पहले के समय में हम सभी कलाकार एक बड़े परिवार की तरह रहते थे। अगर किसी एक की फिल्म चलती थी, तो पूरा बॉलीवुड मिलकर जश्न मनाता था। लेकिन आज माहौल पूरी तरह बदल चुका है। लोग अब एक-दूसरे की सफलता और खुशियों में शामिल होने के बजाय दूरी बना लेते हैं।"
'दूसरी इंडस्ट्री के लोग सफलता से नहीं जलते'
संजय दत्त ने बॉलीवुड की तुलना साउथ फिल्म इंडस्ट्री (South Film Industry) और अन्य क्षेत्रीय सिनेमा से करते हुए एक बड़ा अंतर रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दूसरी फिल्म इंडस्ट्रीज में कलाकारों के बीच जबरदस्त एकजुटता देखने को मिलती है। वहां लोग किसी दूसरे की सफलता से जलते नहीं हैं, बल्कि उसका स्वागत करते हैं और मिलकर काम करते हैं। संजय दत्त के मुताबिक, साउथ सिनेमा की इस भारी सफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी यही एकता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना है, जिसकी कमी आज बॉलीवुड में साफ खलती है।
पुराने दिनों को याद कर हुए भावुक
अपने करियर के शुरुआती दिनों और 80-90 के दशक को याद करते हुए संजय दत्त काफी भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि उस दौर में सेट पर एक अलग ही भाईचारा होता था। एक्टर्स सिर्फ काम के सिलसिले में नहीं, बल्कि सुख-दुख साझा करने के लिए भी एक-दूसरे के साथ बैठते थे। उन्होंने इंडस्ट्री के युवा कलाकारों और मेकर्स को सलाह दी कि अगर बॉलीवुड को फिर से वही पुराना गौरव हासिल करना है, तो सबको अपने अहंकार और ईर्ष्या को भुलाकर एक परिवार की तरह साथ आना होगा।