जब रणवीर सिंह को कहा गया 'फ्लॉप स्टार' और फिल्म से निकाला बाहर, फिर ऐसे रातों-रात बदल दी किस्मत
आज के समय में रणवीर सिंह जैसे बड़े स्टार के लिए किसी प्रोजेक्ट से हाथ धोना अकल्पनीय लग सकता है, लेकिन उनके करियर की शुरुआत ऐसी नहीं थी। लोकप्रिय टॉक शो 'कॉफी विद करण' के सीजन 7 में रणवीर ने अपने जीवन के एक बेहद कड़वे अनुभव को साझा किया था। उन्होंने बताया था कि अनुराग कश्यप की महत्वाकांक्षी फिल्म 'बॉम्बे वेलवेट' के लिए पहले उनके नाम पर विचार किया जा रहा था।
रणवीर ने खुलासा किया कि बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया या ठोस कारण के उन्हें अचानक इस बड़े प्रोजेक्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। निर्माताओं का मानना था कि उस वक्त रणवीर में उतनी 'स्टार पावर' नहीं थी जो इतनी महंगी फिल्म को अपने कंधों पर खींच सके। बाद में यह रोल रणबीर कपूर को मिला। हालांकि, इस रिजेक्शन से टूटने के बजाय रणवीर ने इसे बेहद परिपक्वता से लिया और उद्योग की अनिश्चितताओं को समझकर आगे बढ़ गए।
भंसाली का साथ और बॉक्स ऑफिस पर सफलता का स्वर्णिम काल
'बैंड बाजा बारात' जैसी कल्ट फिल्म से धमाकेदार डेब्यू करने के बाद रणवीर ने कभी भी सेफ गेम नहीं खेला। उन्होंने लगातार चुनौती भरे किरदारों को चुना। निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ उनके सहयोग ने हिंदी सिनेमा के इतिहास में नए पन्ने लिख दिए। 'गोलियों की रासलीला राम-लीला' ने जहां उन्हें मुख्यधारा के नायक के रूप में स्थापित किया, वहीं 'बाजीराव मस्तानी' में पेशवा बाजीराव के किरदार को जीवंत कर उन्होंने अभिनय का लोहा मनवाया।
इतना ही नहीं, 'पद्मावत' में अलाउद्दीन खिलजी के खूंखार और डरावने नेगेटिव किरदार को जिस शिद्दत से रणवीर ने पर्दे पर उतारा, उसने आलोचकों का मुंह बंद कर दिया। एक तरफ जहां उन्होंने 'सिम्बा' जैसी कमर्शियल ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, वहीं दूसरी तरफ 'गली बॉय' के मुराद बनकर धारावी के एक संघर्षरत रैपर की अंतरात्मा को भी पर्दे पर बखूबी उकेरा।
जब फ्लॉप फिल्मों के जाल में फंसे रणवीर, सोशल मीडिया पर शुरू हुई ट्रोलिंग
सफलता के सातवें आसमान पर पहुंचने के बाद रणवीर के करियर ने अचानक एक कठिन मोड़ लिया। भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी जीत पर बनी फिल्म '83' को क्रिटिक्स से खूब सराहना मिली, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर व्यावसायिक रूप से असफल रही। इसके बाद सामाजिक संदेश से भरपूर 'जयेशभाई जोरदार' और रोहित शेट्टी के निर्देशन में बनी भारी-भरकम कॉमेडी फिल्म 'सर्कस' भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में पूरी तरह नाकाम रही।
लगातार तीन बड़ी फिल्मों की विफलता ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी। नेटिजन्स और समीक्षक उनकी स्क्रिप्ट चॉइस पर सवाल उठाने लगे और ऐसा लगने लगा कि बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद स्टार ने अपनी वो जादुई रफ्तार खो दी है। हर नई घोषणा के साथ यह कयास लगाए जाने लगे कि क्या रणवीर कभी वापसी कर पाएंगे?
'धुरंधर' की सुनामी: आलोचकों को दिया करारा जवाब
तमाम आलोचनाओं और सोशल मीडिया के कड़े दौर में भी रणवीर सिंह ने अपनी जुबान से कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने अपनी ऊर्जा को अपने काम में लगाया और इसका नतीजा बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी सुनामी के रूप में सामने आया, जिसका नाम है फिल्म 'धुरंधर'।
इस फिल्म ने दर्शकों को एक बार फिर रणवीर सिंह के असली हुनर की याद दिला दी—भूमिका के प्रति उनका अंधा समर्पण, चौंकाने वाला शारीरिक रूपांतरण और किसी भी किरदार में पूरी तरह ढल जाने की क्षमता। 'धुरंधर' के ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स और लगातार मिली दो बड़ी हिट्स ने साबित कर दिया कि हर शुक्रवार को धारणाएं बदलने वाले इस बॉलीवुड उद्योग में रणवीर सिंह को खारिज करना किसी के बस की बात नहीं है। रणवीर की कहानी यह साफ बयां करती है कि सफलता का मतलब हमेशा जीतना नहीं, बल्कि गिरकर फिर से उठना और हर बार एक धमाकेदार वापसी करना है।