कांग्रेस में गुटबाजी : हरीश रावत का आक्रामक अंदाज, प्रीतम और इंदिरा रक्षात्मक

तल्खियां भरपूर है, पर निजी हमलों से बच रहे हैं इस बार दिग्गज, तेज होती गुटबाजी रोकने की नवनियुक्त प्रभारी के सामने चुनौती

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर ही शह-मात का खेल चलता रहता है, लेकिन राज्य में विधानसभा चुनाव की आहट होते ही यह पहले से तेजी पकड़ने लगा है। धुरंधर और दिग्गज नेता हरीश रावत आक्रामक अंदाज में हैं। उनकी नपी-तुली चाल और सोशल मीडिया में कमेंट विरोधी नेताओं को असहज कर रहे हैं।
harish rawt

सबसे बड़ी चुनौती देवेंद्र यादव महसूस कर रहे

हरीश रावत को बेबाक अंदाज में जवाब देती आईं नेता प्रतिपक्ष डाॅ इंदिरा ह्दयेश और पार्टी के भीतर उनके मजबूत जोड़ीदार प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह फिलहाल रक्षात्मक है। तेज होती गुटबाजी से सबसे बड़ी चुनौती नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव महसूस कर रहे हैं।

दिरा-प्रीतम की घेराबंदी का प्रयास

दरअसल, हरीश रावत का जो विराट कद है, उसमें उन्हें आसानी से कुछ कह पाना किसी नेता के लिए संभव नहीं है। फिर, राजनीति में एक लंबा समय बिता चुके हरीश रावत अपना विरोध भी इस अंदाज में जाहिर करते हैं कि उसे सीधे सीधेे अनुशासनहीनता के दायरे में रखना कठिन हो जाता है।
यही वजह है कि इंदिरा-प्रीतम की जोड़ी फूंक फूंककर कदम आगे बढ़ाती है। अपनी उपेक्षा के मामले को जिस तरह से हरीश रावत ने उठाया है, वह सीधेे-सीधे इंदिरा-प्रीतम की घेराबंदी का प्रयास माना जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत कह रहे हैं कि उनके लिए न मंच पर कोई जगह होती है और न ही पार्टी के बैनर-होर्डिंग्स और पोस्टरों में।

हरीश रावत अब बिफर गए

माना जा रहा है कि हरीश रावत इस बात से खफा हैं कि 2016 में पार्टी और उनकी सरकार से बगावत करके भाजपा में जाने वाले कुछ नेताओं की घर वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष डाॅ. इंदिरा ह्दयेश कुछ लोगों के संपर्क में होने की बात कह चुकी हैं।
पूर्व में कुछ एक ऐसे नेताओं को इंदिरा-प्रीतम की जोड़ी पार्टी में शामिल करा चुकी है, जो हरीश रावत को कतई नापसंद रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष के दावे में कितना दम है, यह अलग बात है, लेकिन हरीश रावत विरोधी नेताओं की घर वापसी के प्रयास तो लंबे समय से किए ही जा रहे हैं। चुनाव से पहले इस कवायद को तेज किया गया, तो हरीश रावत अब बिफर गए हैं। हालांकि औपचारिक तौर पर किसी की भी घर वापसी का उन्होंने विरोध नहीं किया है, लेकिन वह ऐसा कतई चाहते नहीं हैं। इसलिए उपेक्षा के मुद्दे को इस मौके पर हवा देने में जुट गए हैं।

हरीश रावत की मांग

चुनाव में पार्टी का चेहरा घोषित करने की मांग करके भी हरीश रावत इस बात का आंकलन कर लेना चाहते हैं कि हाईकमान उत्तराखंड के संदर्भ में उनकी बात को कितना तवज्जो दे रहा है। ताकि उसी हिसाब से पार्टी के भीतर वह अपने विरोधियों से लड़ाई लड़ सकें। इन स्थितियों के बीच, इस बार पार्टी में हरीश विरोधी गुट के नेता आक्रामक अंदाज में पलटवार नहीं कर रहे हैं। यह माना जा रहा है कि यह गुट हाईकमान को कोई गलत संदेश देने से बच रहा है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री नवीन जोशी का कहना है कि कांग्रेस एकजुट है और सभी के आपसी सम्मान को कायम रखते हुए भाजपा को हराने के लिए आगे बढ़ रही है।

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