जानिए क्या है गर्दन और कंधे के इस अजीब खेल का वैज्ञानिक सच और इससे बचने के आसान उपाय
आज की भागदौड़ भरी और आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक बीमारियां और दर्द आम बात हो गए हैं, लेकिन कई बार हमारे शरीर में होने वाला दर्द ऐसा भ्रम पैदा करता है जिसे समझ पाना हर आम इंसान के बस की बात नहीं होती है। क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है कि आपके कंधे में तेज दर्द उठ रहा हो, लेकिन जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो वे आपको गर्दन का इलाज कराने की सलाह देते हैं? सुनने में यह भले ही थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान और आर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार यह एक बेहद आम और गंभीर शारीरिक स्थिति है जिसे 'रेफर्ड पेन' (Referred Pain) कहा जाता है। अक्सर लोगों को यह गलतफहमी रहती है कि कंधे का दर्द केवल कंधे की किसी अंदरूनी चोट या मांसपेशियों की खिंचाव की वजह से होता है, जबकि असलियत इसके बिल्कुल विपरीत होती है। हमारी गर्दन और कंधे की मांसपेशियां, नसें और हड्डियां इस तरह से आपस में जुड़ी होती हैं कि कई बार समस्या गर्दन के किसी हिस्से में होती है लेकिन उसका अहसास या तीखा दर्द सीधे हमारे कंधे और बांहों तक पहुंच जाता है। इस अनोखे और भ्रामक शारीरिक खेल को समय रहते समझना और इसके शुरुआती लक्षणों की पहचान करना हर व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक हो गया है, ताकि किसी बड़ी मेडिकल समस्या से बचा जा सके।
रीढ़ की हड्डी और नसों का उलझा हुआ जाल: क्यों गर्दन की समस्या का दर्द सीधे कंधे और हाथों तक पहुंच जाता है?
इस वैज्ञानिक रहस्य को गहराई से समझने के लिए हमें मानव शरीर की तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और एनाटॉमी की बनावट को थोड़ा करीब से देखना होगा। हमारी रीढ़ की हड्डी का जो हिस्सा गर्दन से गुजरता है उसे सर्वाइकल स्पाइन (Cervical Spine) कहा जाता है, जिससे कई महत्वपूर्ण नसें निकलकर हमारे कंधों, हाथों और उंगलियों तक संवेदनाएं और संकेत पहुंचाने का काम करती हैं। जब लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने, लगातार कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर झुककर काम करने या गर्दन की मांसपेशियों में अत्यधिक खिंचाव आने के कारण सर्वाइकल वर्टेब्रै पर दबाव पड़ता है, तो वहां की नसें दब जाती हैं। इन नसों के दबने या उनमें सूजन आने के कारण जो न्यूरोलॉजिकल सिग्नल्स दिमाग तक पहुंचते हैं, वे हमारे मस्तिष्क को यह संदेश देते हैं कि दर्द कंधे या बांह के हिस्से में हो रहा है, जबकि असल उद्गम स्थल हमारी गर्दन होती है। इसे ही चिकित्सा जगत में 'रेफर्ड पेन' यानी संदर्भित दर्द कहा जाता है, और यही वह मुख्य वजह है जिसके कारण मरीज को डॉक्टर के पास जाने के बाद ही वास्तविक बीमारी का पता चल पाता है। यदि इस शुरुआती लक्षण को नजरअंदाज कर दिया जाए, तो यह आगे चलकर सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस (Cervical Spondylosis) या गंभीर नसों के विकार का रूप ले सकता है, जिससे रोगी की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।
गलत पोस्चर, डेस्क जॉब और आधुनिक जीवनशैली बन रही है मुख्य वजह: जानिए इस अजीब दर्द से बचाव के लिए कौन सी सावधानियां हैं जरूरी
आज के इस दौर में जहां आईटी सेक्टर, कॉर्पोरेट ऑफिस और घर से काम करने वाले लाखों लोग दिन के आठ से दस घंटे लगातार एक ही कुर्सी पर बैठकर कंप्यूटर के आगे गुजारते हैं, उनके लिए यह गर्दन और कंधे का दर्द एक आम बीमारी बन चुका है। गलत तरीके से बैठना, सिर को लगातार आगे झुकाकर रखना, और लंबे समय तक फिजिकल एक्टिविटी या व्यायाम न करना हमारी मांसपेशियों को कमजोर कर देता है, जिससे सर्वाइकल क्षेत्र पर अत्यधिक दबाव पड़ने लगता है। इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों और फिजियोथेरेपिस्ट्स की सलाह है कि हर 45 से 60 मिनट के काम के बाद अपनी सीट से उठकर हल्का ब्रेक लें, गर्दन और कंधों के कुछ बुनियादी स्ट्रेचिंग व्यायाम करें और अपने बैठने के पोस्चर (Ergonomic Posture) को पूरी तरह दुरुस्त रखें। सोने के दौरान बहुत ऊंचे या सख्त तकिए का इस्तेमाल करने से भी बचें, क्योंकि यह भी गर्दन की नसों पर दबाव डालने का एक बड़ा कारण बनता है। यदि कंधे या गर्दन का यह दर्द लंबे समय तक बना रहता है और घरेलू उपायों या मालिश से ठीक नहीं होता है, तो किसी योग्य डॉक्टर या न्यूरोलॉजिस्ट से तुरंत परामर्श करना चाहिए ताकि समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके और इस अजीब दर्द के जाल से हमेशा के लिए राहत पाई जा सके।